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जयपुर के गुलाल गोटे: होली का रंग और भाईचारे की मिसाल

जयपुर: होली का त्यौहार नजदीक आते ही बाजारों में रजवाड़ी गुलाल गोटे की चमक बढ़ने लगी है। यह खास गुलाल गोटे जयपुर के मुस्लिम कारीगरों द्वारा बनाए जाते हैं, लेकिन हिंदू समुदाय इन्हें खरीदकर होली के उत्सव में उपयोग करता है। यह परंपरा आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द्र की एक अनूठी मिसाल है।

सात पीढ़ियों से गुलाल गोटा बना रहा जयपुर का एक परिवार

जयपुर के मनिहारों के रास्ते में रहने वाले कई मुस्लिम परिवार पीढ़ियों से गुलाल गोटा बनाने का काम कर रहे हैं। अमजद खान का परिवार सात पीढ़ियों से इस परंपरा को निभा रहा है। उनका कहना है कि राजाओं के समय होली के लिए कुछ अनोखा बनाने की मांग पर लाख से बने इन हल्के और गोल गोटों की शुरुआत हुई थी, जिनके अंदर गुलाल भरा जाता है।

कैसे बनता है गुलाल गोटा?

गुलाल गोटा बनाने की प्रक्रिया बहुत मेहनत भरी होती है:

  1. लाख (एक प्रकार का गोंद) को पिघलाकर छोटे-छोटे गोले बनाए जाते हैं।
  2. इन गोलों को सुखाकर उनके अंदर सूखा गुलाल भरा जाता है
  3. फिर इन्हें सुंदर रंगों से सजाया जाता है और बाजारों में भेजा जाता है।

देश और विदेश में बढ़ रही मांग

गुलाल गोटा अब केवल भारत में ही नहीं, बल्कि जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों तक भी पहुंच रहा है। जयपुर से हर साल लाखों रुपये का गुलाल गोटा निर्यात किया जाता है। इस बार होली को लेकर लोगों में खासा उत्साह है, जिससे गुलाल गोटों की बुकिंग पहले से ही पूरी हो चुकी है

होली और भाईचारे का संदेश

गुलाल गोटा सिर्फ एक होली का उत्पाद नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द्र और साझा संस्कृति का प्रतीक भी है। जयपुर के मुस्लिम कारीगरों की मेहनत से हिंदुओं के त्योहार में रंग भरता है, जिससे समाज में एकता और भाईचारे का संदेश जाता है। यह परंपरा हर साल और मजबूत होती जा रही है और दुनिया भर में जयपुर के गुलाल गोटों की पहचान बना रही है।

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