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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में पहली बार ड्रोन के जरिए कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) का प्रयोग किया गया और यह पूरी तरह सफल रहा। सोमवार सुबह रामगढ़ बांध क्षेत्र में किए गए इस क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन से करीब 40 मिनट तक हल्की बारिश हुई।
कैसे हुआ यह प्रयोग?
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यह ऑपरेशन सुबह 6:30 बजे से 11:30 बजे तक चला।
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इस दौरान दो ‘मेक इन इंडिया’ ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
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ड्रोन में खास तरह का ‘हाइड्रोट्रेस पेलोड’ लगाया गया, जो बादलों में बारिश कराने वाला रसायन फैलाता है।
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ऑपरेशन को हाइड्रोट्रेस नामक AI आधारित प्लेटफॉर्म की मदद से चलाया गया।
मौसम से जुड़ी जानकारी:
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बादल की ऊंचाई: समुद्र तल से लगभग 800 मीटर ऊपर
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सीडिंग की ऊंचाई: लगभग 850 मीटर
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बादलों का फैलाव: 0.8 किलोमीटर
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जगह के निर्देशांक: 27.020°N, 76.040°E
कितना हुआ बारिश का असर?
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ऑपरेशन के बाद क्षेत्र में करीब 0.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
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पहले अनुमानित बारिश 0.6 मिमी थी, लेकिन असल में उससे ज्यादा वर्षा हुई।
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बारिश की वजह से बादलों की बूंदों का आकार और संख्या बढ़ी, जो क्लाउड सीडिंग के सफल परिणाम माने जाते हैं।
क्या है हाइड्रोट्रेस तकनीक?
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यह एक AI-संचालित तकनीक है जो मौसम के डेटा को पढ़कर यह तय करती है कि कब और कहां क्लाउड सीडिंग की जाए।
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इस तकनीक को खासतौर पर भारतीय जलवायु के अनुसार तैयार किया गया है।
क्यों है यह प्रयोग महत्वपूर्ण?
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यह भारत में जल संकट और सूखे जैसी समस्याओं से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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मेक इन इंडिया ड्रोन और AI तकनीक के सफल इस्तेमाल से भविष्य में जलवर्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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यह प्रयोग भारत की दीर्घकालिक जल सुरक्षा रणनीति को मजबूत करने की ओर इशारा करता है।
निष्कर्ष:
जयपुर में किया गया यह पहला सफल क्लाउड सीडिंग प्रयोग न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। इससे साबित होता है कि भारत की तकनीकी क्षमता अब जलवायु सुधार जैसे क्षेत्रों में भी ठोस नतीजे देने लगी है।
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