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राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के सांगानेर इलाके में आवासन मंडल (हाउसिंग बोर्ड) की जमीन पर बसी अवैध कॉलोनियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने हाउसिंग बोर्ड को तीन सप्ताह के भीतर अतिक्रमण हटाकर पालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि आदेश का पालन नहीं होने पर आवासन आयुक्त को अदालत में पेश होना होगा।
कोर्ट ने क्यों दिया आदेश?
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संगीता शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिका दायर करने वाली संस्था ने कोर्ट को बताया कि पहले भी 20 अगस्त को हाईकोर्ट ने आवासन मंडल की जमीन पर बसी 87 अवैध कॉलोनियों को हटाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे।
लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाया गया। उल्टा वहां निर्माण कार्य जारी है और कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।
तीन हफ्ते में रिपोर्ट देनी होगी
कोर्ट ने साफ कहा है कि तीन सप्ताह के भीतर अतिक्रमण हटाकर पूरी रिपोर्ट पेश की जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो आवासन आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होकर जवाब देना होगा।
क्या है पूरा मामला?
याचिका में बताया गया कि बी-2 बाईपास से सांगानेर के पास की 87 कॉलोनियों की जमीन आवासन मंडल ने किसानों से खरीद ली थी और भुगतान भी कर दिया था।
इसके बावजूद आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने भूमाफियाओं से मिलीभगत कर इन जमीनों पर कब्जा करवा दिया और बाद में उन्हें नियमित (नियमन) करने की कोशिश भी की।
इस नियमन आदेश को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने अब सख्त आदेश जारी किया है।
हाईकोर्ट के इस फैसले से साफ संकेत गया है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और अधिकारियों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि तय समय में अतिक्रमण हटाया जाता है या नहीं।
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