दमिश्क/वॉशिंगटन: कभी जिसे अमेरिका ने आतंकवाद के आरोप में मोस्ट वांटेड घोषित कर रखा था, आज वही शख्स सीरिया की बागडोर संभाले बैठा है। और अब, अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसी व्यक्ति के साथ हाथ मिलाकर वर्षों पुराने प्रतिबंधों को हटा दिया है। यह फैसला दुनिया की सबसे बड़ी ताकत की आतंकवाद नीति पर गहरे सवाल खड़े कर रहा है।
अहमद अल-शरा: आतंक से सत्ता तक का सफर
सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा का नाम पहले अल-कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों से जुड़ा हुआ था। अमेरिका ने उनके सिर पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा था। लेकिन अब वही शख्स एक अंतरराष्ट्रीय नेता के रूप में उभरकर सामने आया है। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सऊदी अरब में अल-शरा से मुलाकात की और उसी के बाद अमेरिका ने सीरिया पर लगे लगभग सभी प्रतिबंध हटा लिए।
अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में बदलाव
इस अभूतपूर्व घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कूटनीतिक समीकरणों को हिला दिया है। अमेरिका के इस कदम को कुछ विश्लेषक सीरिया में स्थिरता लाने की रणनीति बता रहे हैं, तो वहीं कई आलोचकों का कहना है कि यह फैसला अमेरिका की दोहरी आतंकवाद नीति को उजागर करता है।
ट्रंप की विदेश नीति पर बहस तेज
डोनाल्ड ट्रंप का यह निर्णय उनकी विदेश नीति में एक यू-टर्न जैसा दिखता है। अब विश्लेषकों और मानवाधिकार संगठनों के बीच यह बहस छिड़ गई है कि क्या इस फैसले से अमेरिका की आतंक विरोधी साख को नुकसान हुआ है? या यह एक व्यावसायिक और राजनीतिक समझौते का हिस्सा है?
25 साल बाद उच्च-स्तरीय वार्ता, इजरायल से संबंधों की चर्चा
सीरिया और अमेरिका के बीच यह 25 वर्षों में पहली बड़ी बैठक थी। सूत्रों की मानें तो इस मुलाकात में अब्राहम समझौते के तहत इजरायल को मान्यता देने पर भी चर्चा हुई है। हालांकि, सीरियाई प्रशासन ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
दुनिया देख रही है सीरिया की नई भूमिका
सीरिया अब वैश्विक मंच पर एक बार फिर मुख्यधारा में लौटने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका के साथ संबंधों का यह नया अध्याय, न केवल पश्चिम एशिया की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि यह तय करेगा कि आतंक से जुड़े अतीत को राजनीति में कितना स्वीकार किया जा सकता है।
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