पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान भले ही जेल में बंद हों, लेकिन उन्होंने राजनीतिक मोर्चे पर दो ऐसे दांव खेले हैं, जिन्होंने शहबाज शरीफ सरकार और आर्मी चीफ असीम मुनीर को चिंता में डाल दिया है। एक ओर इमरान ने भारत का जिक्र कर सरकार की कूटनीतिक विफलता को उजागर करने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने लंदन में मौजूद अपने बेटों को अंतरराष्ट्रीय मंच से समर्थन जुटाने के लिए सक्रिय कर दिया है।
जेल से भेजे दो खास संदेश
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इमरान खान ने रावलपिंडी की आदियाला जेल से दो अहम संदेश बाहर भेजे हैं। एक संदेश उन्होंने अपने समर्थक पत्रकारों को, और दूसरा अपने बेटों को लंदन में दिया है।
1. भारत को लेकर सरकार पर हमला
इमरान खान ने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा है कि पाकिस्तान सीजफायर को लेकर जश्न मना रहा है, जबकि असली लड़ाई — यानी मनोवैज्ञानिक युद्ध — में भारत ने बाज़ी मार ली है। उनका कहना है कि मौजूदा हुक्मरान इस मोर्चे पर पूरी तरह फेल हैं और भारत किसी भी समय बड़ा कदम उठा सकता है। इमरान ने देशवासियों से अपील की कि वे इस सरकार के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों।
2. बेटों को सौंपी अंतरराष्ट्रीय अभियान की कमान
दूसरे संदेश में इमरान ने अपने बेटों को लंदन से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में पाकिस्तान के राजनीतिक हालात को उजागर करने को कहा। इसके बाद पहली बार इमरान के बेटे सार्वजनिक रूप से सामने आए और उन्होंने इंटरव्यू के ज़रिए पाकिस्तान में लोकतंत्र के दमन का मुद्दा उठाया। उनका कहना है, “हमारे पिता निर्दोष हैं, और हम वैश्विक मंचों से उनकी रिहाई के लिए समर्थन जुटाएंगे।”
बेटों की सियासी एंट्री और सोशल मीडिया अभियान
पहली बार इमरान खान के बेटे सक्रिय रूप से राजनीतिक मंच पर दिखे हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में वे सोशल मीडिया के ज़रिए एक वैश्विक अभियान छेड़ सकते हैं, जिससे न केवल पाकिस्तान की मौजूदा सत्ता पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि पीटीआई को भी नया संबल मिलेगा।
इमरान की पकड़ अब भी बरकरार
जेल में होने के बावजूद इमरान खान की लोकप्रियता में कोई खास गिरावट नहीं आई है। खैबर पख्तूनख्वा, सिंध और गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे इलाकों में उनकी पार्टी अब भी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। ऐसे में यदि इमरान की रणनीति कामयाब होती है, तो पाकिस्तान की सत्ता में एक नया मोड़ आ सकता है।
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