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जोधपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर में शुक्रवार को एक ब्रेन डेड मरीज विमल कुमार के अंगदान से दो लोगों को नई जिंदगी मिली। 41 साल के विमल की दोनों किडनी खराब थीं और वे डायलिसिस पर थे। कुछ दिन पहले हाई ब्लड प्रेशर की वजह से उनके दिमाग की नस फट गई और वे ब्रेन डेड हो गए।
हार्ट और लिवर दो लोगों को दिए गए
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एम्स के डॉक्टरों ने विमल का हार्ट, लिवर और दोनों आंखें (कॉर्निया) निकाले।
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हार्ट को लेने अहमदाबाद के सीम्स अस्पताल की टीम जोधपुर पहुंची।
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दोपहर में विमल का दिल हेलिकॉप्टर से अहमदाबाद भेजा गया, जहां 30 साल के युवक को ट्रांसप्लांट किया गया।
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उनका लिवर जोधपुर एम्स में ही एक 18 साल के किशोर को लगाया गया, जो एंड स्टेज लिवर डिजीज से पीड़ित था।
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आंखें भी जरूरतमंद को दी जाएंगी।
पत्नी ने हार्ट ट्रांसप्लांट बॉक्स पर माला चढ़ाई
जब डॉक्टर विमल का दिल एक बॉक्स में लेकर रवाना हुए, तो उनकी पत्नी मधु ने उस बॉक्स पर माला चढ़ाई। पति का दिल जाते देख उनकी आंखें भर आईं। इस भावुक पल ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।
अब तक एम्स जोधपुर में हुए अंग प्रत्यारोपण
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21 लीवर ट्रांसप्लांट हो चुके हैं – इनमें 11 जीवित डोनर से और 10 मृतक डोनर से।
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3 हार्ट रिट्रीवल हो चुके हैं।
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73 किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं।
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फेफड़े और कॉर्निया भी दान किए गए हैं।
सोटो करता है अंगों के वितरण का फैसला
राजस्थान में स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (SOTO) तय करता है कि ब्रेन डेड मरीज के अंग किसे और कहां लगाए जाएंगे। सोटो ने ही विमल का हार्ट अहमदाबाद भेजने और लिवर जोधपुर में लगाने का निर्णय लिया।
अंगदान से जीवन की रोशनी
विमल की मौत के बाद भी उनके अंगों ने दो लोगों की जिंदगी रोशन कर दी। उनका यह कदम समाज के लिए एक मिसाल है। उनकी पत्नी का साहस और यह निर्णय बहुत प्रेरणादायक है।
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