इंग्लैंड के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम का प्रदर्शन कई मौकों पर शानदार रहा है। अभी तक तीन टेस्ट मैच खेले जा चुके हैं, जिनमें भारत ने दमदार बल्लेबाजी और गेंदबाजी से इंग्लैंड को कई बार दबाव में डाला है। लेकिन इसके बावजूद टीम इंडिया सीरीज में 1-2 से पीछे चल रही है। इस पिछड़ने की एक बड़ी वजह है – नंबर-3 बल्लेबाज की नाकामी।
टेस्ट क्रिकेट में नंबर-3 बल्लेबाज को टीम की रीढ़ माना जाता है। ओपनर के जल्दी आउट होने की स्थिति में नंबर-3 बल्लेबाज ही पारी को संभालता है और टीम को स्थिरता देता है। आंकड़ों के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक (399) नंबर-3 पोजीशन पर ही बने हैं। इसलिए इस स्थान पर किसी भरोसेमंद बल्लेबाज का होना बहुत जरूरी है। इस बार इंग्लैंड दौरे पर भारत की ओर से करुण नायर और साई सुदर्शन को नंबर-3 पर मौका दिया गया है। साई सुदर्शन ने इस सीरीज के पहले टेस्ट में डेब्यू किया था, लेकिन वे पहली पारी में शून्य और दूसरी पारी में सिर्फ 30 रन ही बना सके। करुण नायर को इसके बाद मौका मिला, लेकिन वे भी बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे और 40 रन का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके।
भारत के लिए यह समस्या कोई नई नहीं है। पिछले पांच सालों (2020 से अब तक) में भारत ने नंबर-3 पर 11 अलग-अलग बल्लेबाजों को आजमाया है। इन सभी ने मिलाकर 52 टेस्ट मैचों में सिर्फ 30.83 की औसत से रन बनाए हैं। यह औसत ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, पाकिस्तान, श्रीलंका और न्यूजीलैंड जैसे देशों से काफी पीछे है। भारत से खराब औसत सिर्फ बांग्लादेश, वेस्टइंडीज, आयरलैंड और जिम्बाब्वे का है।
करुण नायर को चेतेश्वर पुजारा की जगह आजमाया गया है, लेकिन उनके आंकड़े पुजारा से काफी कमजोर हैं। करुण नायर ने 9 टेस्ट मैचों में 505 रन बनाए हैं, जिनमें से 303 रन एक ही पारी में थे। बाकी सभी पारियों में उनका योगदान बहुत कम रहा है। दूसरी तरफ, पुजारा ने सिर्फ करुण के दो 40+ स्कोर के बीच करीब 4000 रन बना दिए थे।
टीम इंडिया को अब इस स्थिति को गंभीरता से लेना होगा। नंबर-3 पर स्थायी और भरोसेमंद बल्लेबाज की जरूरत है जो मुश्किल समय में टीम को संभाल सके। हो सकता है कि पुजारा की वापसी या शुभमन गिल को इस पोजीशन पर स्थायी रूप से आजमाना एक बेहतर विकल्प हो।
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