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राजस्थान के टोंक जिले में बांध और तालाबों के बेहतर उपयोग और रखरखाव के लिए सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। अब मत्स्य पालन और उससे जुड़े टेंडर का काम मत्स्य विभाग करेगा, जबकि देखरेख की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग के पास होगी। पहले यह जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों के पास थी।
पंचायतों से मिल रही थीं शिकायतें
कई ग्राम पंचायतों से शिकायत मिल रही थी कि बांध और तालाबों की सही देखरेख नहीं हो पा रही है। कई जगह पाल टूटने, गाद भरने और पानी निकासी की व्यवस्था खराब होने से ग्रामीणों को परेशानी हो रही थी। इसके अलावा मत्स्य पालन के टेंडर में अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आई थीं। इसलिए सरकार ने जिम्मेदारी में बदलाव किया है।
जिले में हैं करीब 200 बड़े बांध और तालाब
टोंक जिले में लगभग 200 बड़े बांध और तालाब हैं, जो सिंचाई और जल संरक्षण के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा करीब 250 छोटे तालाबों को भी विकसित करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि वहां भी मत्स्य पालन शुरू किया जा सके।
हर साल मिल रहा 10.50 करोड़ का राजस्व
जिले में मत्स्य पालन से अभी हर साल करीब 10 करोड़ 50 लाख रुपये का राजस्व मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जलाशयों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए तो मछली उत्पादन और राजस्व दोनों बढ़ सकते हैं।
रोजगार के बढ़ेंगे अवसर
मत्स्य पालन के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ने की उम्मीद है।
टेंडर की अलग-अलग व्यवस्था
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जिन बांधों से 5 लाख रुपये से ज्यादा राजस्व मिलता है, उनका टेंडर राज्य सरकार करती है। ऐसे बांधों की संख्या करीब 60 है।
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50 हजार से 5 लाख रुपये तक राजस्व वाले बांधों को बी श्रेणी में रखा गया है।
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इससे कम आय वाले बांध सी और डी श्रेणी में आते हैं।
अब बी, सी और डी श्रेणी के लगभग 140 बांधों का टेंडर मत्स्य विभाग अपने स्तर पर जारी करेगा।
मानसून से भरे बांध और तालाब
पिछले कुछ वर्षों में अच्छे मानसून के कारण जिले के अधिकांश बांध और तालाब पानी से भरे हुए हैं। इससे पेयजल, सिंचाई और मत्स्य पालन तीनों क्षेत्रों में लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
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