1 जुलाई से प्रधानमंत्री पद से निलंबन
थाईलैंड की संवैधानिक अदालत ने प्रधानमंत्री पैटोंगटर्न शिनवात्रा को उनके पद से 1 जुलाई से निलंबित कर दिया है। यह निर्णय, कंबोडिया के पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन के साथ उनकी एक कथित बातचीत की जांच के चलते लिया गया है।
📞 “अंकल” और “विरोधी” शब्दों से मचा बवाल
थाई-कंबोडिया सीमा विवाद के बीच, एक गुप्त रिकॉर्डिंग सामने आई जिसमें प्रधानमंत्री पैटोंगटर्न ने हुन सेन को “अंकल” और एक थाई सैन्य अधिकारी को “विरोधी” कहकर संबोधित किया।
यह बात सामने आते ही राजनीतिक भूचाल आ गया और कई रूढ़िवादी सांसदों ने उन्हें कंबोडिया के प्रति झुकाव और थाई सेना को कमजोर करने का आरोप लगाया।
⚖️ संवैधानिक अदालत का फैसला
थाईलैंड की संवैधानिक अदालत ने 7-2 के बहुमत से यह निर्णय लिया कि जब तक इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक प्रधानमंत्री पैटोंगटर्न को कार्यभार से अलग रखा जाएगा।
उन पर संविधान के तहत मंत्री के लिए जरूरी “स्पष्ट ईमानदारी” और “नैतिक मानकों” के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
💥 सीमा विवाद से उभरी राजनीतिक हलचल
यह विवाद तब शुरू हुआ जब मई में थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई थी।
तनाव को कम करने के लिए पैटोंगटर्न ने हुन सेन को फोन किया, लेकिन उस बातचीत की रिकॉर्डिंग लीक हो गई और वही अब उनके खिलाफ मुख्य सबूत बन गई है।
🔎 आगे क्या होगा?
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न्यायालय में सुनवाई जारी रहेगी।
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प्रधानमंत्री को अपना जवाब 15 दिनों के भीतर देना होगा।
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जब तक अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक डिप्टी पीएम सुरिया जुआंगरुआंगकित कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाएंगे।
यह मामला केवल एक कूटनीतिक कॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि थाईलैंड की राजनीतिक स्थिरता, सेना-सत्ता के रिश्ते और दक्षिणपूर्व एशिया में क्षेत्रीय कूटनीति पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
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