रोम:
दक्षिणी यूरोप के कई हिस्सों में भीषण गर्मी ने हालात बिगाड़ दिए हैं, जहां इटली, स्पेन, ग्रीस और पुर्तगाल जैसे देशों में तापमान 40°C (104°F) से ऊपर पहुंच गया है। स्थानीय प्रशासन ने वाइल्डफायर (जंगल की आग) के खतरे को देखते हुए नई चेतावनियां जारी की हैं।
जलवायु परिवर्तन को इन हीटवेव की बढ़ती तीव्रता और आवृत्ति से जोड़ा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप के दक्षिणी हिस्सों में इस तरह की अत्यधिक मौसम घटनाएं अब सामान्य होती जा रही हैं।
प्रमुख देश और स्थिति:
🇵🇹 पुर्तगाल:
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देश के दो-तिहाई हिस्से में रविवार को हीट अलर्ट जारी किया गया।
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लिस्बन में तापमान 42°C (107°F) तक पहुंचने की आशंका।
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जंगल की आग के खतरे को देखते हुए आपात सेवाएं सक्रिय।
🇮🇹 इटली:
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लाज़ियो, टस्कनी, कालाब्रिया, पुलिया और उम्ब्रिया जैसे क्षेत्रों में दोपहर की भीषण गर्मी के दौरान बाहरी काम पर प्रतिबंध की योजना।
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21 शहरों को स्वास्थ्य मंत्रालय ने हीट रेड अलर्ट पर रखा, जिनमें रोम, मिलान और नेपल्स जैसे पर्यटन स्थल शामिल हैं।
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छांव की तलाश, सार्वजनिक फव्वारों से पानी पीना, और छतरी के सहारे बचाव – ऐसे नज़ारे पूरे रोम में देखे गए।
🇬🇷 ग्रीस:
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गर्मी के चलते वाइल्डफायर का हाई अलर्ट।
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एथेंस के दक्षिण में लगी भीषण आग ने प्राचीन पोसाइडन मंदिर के पास के इलाकों को प्रभावित किया।
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130 फायरफाइटर्स, 12 हवाई जहाज और 12 हेलिकॉप्टर की तैनाती।
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40 से अधिक लोगों की आपातकालीन निकासी, पांच क्षेत्रों में निकासी आदेश लागू।
🇪🇸 स्पेन:
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सेविले और मध्य/दक्षिणी क्षेत्रों में तापमान 42°C तक पहुंचा।
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मौसम विभाग AEMET के अनुसार, जून महीने का रिकॉर्ड टूटना लगभग तय, यह इतिहास का सबसे गर्म जून हो सकता है।
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बुज़ुर्गों और बच्चों के लिए विशेष सावधानियां – दोपहर में शारीरिक गतिविधि न करने और खूब पानी पीने की सलाह।
विशेषज्ञों की चेतावनी:
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द लैंसेट पब्लिक हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि वर्तमान जलवायु नीतियों में बदलाव नहीं किया गया तो हीट से होने वाली मौतें 2050 तक चौगुनी हो सकती हैं।
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जबकि ठंड से मरने वालों की संख्या अब भी अधिक है, बढ़ते तापमान से भविष्य में कुल मौतों में शुद्ध वृद्धि होने की आशंका है।
निष्कर्ष:
भीषण गर्मी अब सिर्फ मौसम की असामान्यता नहीं रही – यह एक नई जलवायु वास्तविकता बन रही है। दक्षिणी यूरोप के देश जहां एक तरफ पर्यटन सीज़न का आनंद लेने आते हैं, वहीं अब उन्हें वाइल्डफायर और स्वास्थ्य संकटों का भी सामना करना पड़ रहा है।
सरकारों और लोगों दोनों को जल्द से जल्द जलवायु परिवर्तन के अनुकूल रणनीतियां अपनानी होंगी।
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