दमोह: शहर में बिजली चोरी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। 4400 उपभोक्ता ऐसे मिले हैं, जो मीटर वाचकों से सांठगांठ कर रीडिंग को गलत तरीके से दिखाकर बिजली की चोरी कर रहे थे। बिजली कंपनी ने जांच के बाद इन पर सख्त कार्रवाई शुरू की है।
कैसे हुआ खुलासा?
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बिजली कंपनी ने फोटो रीडिंग के आधार पर जांच की, जिसमें पाया गया कि हजारों उपभोक्ताओं की मीटर फोटो हमेशा धुंधली आती थी।
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इससे शक हुआ कि ये उपभोक्ता जानबूझकर रीडिंग को छुपा रहे हैं और मीटर वाचकों से मिलकर बिजली की चोरी कर रहे हैं।
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इस तरह सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी का भी गलत फायदा उठाया जा रहा था।
अब तक की कार्रवाई
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कंपनी ने अब तक 3000 घरों में स्मार्ट मीटर लगवा दिए हैं, ताकि बिजली की सही रीडिंग हो सके।
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बाकी बचे 1400 घरों में भी जल्द ही स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।
कौन कर रहे थे चोरी?
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बिजली विभाग के मुताबिक, ज्यादातर बिजली चोरी करने वाले परिवार सक्षम यानी अमीर थे।
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ये लोग AC, कूलर, पंखे और भारी बिजली उपकरण चला रहे थे, लेकिन बिल कम दिखाकर चोरी कर रहे थे।
स्मार्ट मीटर लगने से हुआ असर
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स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं को अब समझ में आ रहा है कि वे कितना बिजली खर्च करते हैं।
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कई उपभोक्ताओं को अब लग रहा है कि उनका बिजली बिल ज्यादा आ रहा है, क्योंकि अब चोरी संभव नहीं रही।
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सरकार की तरफ से 150 यूनिट तक बिजली पर सब्सिडी दी जाती है, लेकिन उससे ज्यादा खर्च करने पर ये लाभ नहीं मिलता।
महत्वपूर्ण आंकड़े:
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शहर में कुल 34,000 बिजली उपभोक्ता हैं।
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अब तक 31,000 घरों में स्मार्ट मीटर लग चुके हैं।
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630 बिजली चोरी के केस एक साल में दर्ज हुए।
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हर महीने 400 उपभोक्ताओं के कनेक्शन बिल न भरने पर काटे जा रहे हैं।
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80 उपभोक्ताओं के बैंक खाते भी सीज किए जा चुके हैं।
बिजली कंपनी का बयान:
“स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ता अपनी बिजली खपत को समझ पा रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें हो रही है, जो सालों से चोरी की बिजली इस्तेमाल कर रहे थे। हमने 4400 ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान की है, जिनकी रीडिंग जानबूझकर साफ नहीं आती थी। अब 3000 घरों में स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। समस्या केवल उन्हीं को है, बाकी उपभोक्ता सही से बिल भर रहे हैं।”
— एम. एल. साहू, ईई, बिजली कंपनी.
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