केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बड़ा विवाद, 45 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट की परमिशन खत्म होने का दावा
channel_009 | Environment News
देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना कही जाने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना अब बड़े कानूनी और पर्यावरणीय विवाद में घिर गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 45,000 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट की परमिशन खत्म हो चुकी है और वन विभाग की जरूरी क्लीयरेंस के बिना निर्माण कार्य जारी होने का दावा किया जा रहा है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना का मकसद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की समस्या को कम करना है। इस प्रोजेक्ट के तहत केन नदी का पानी बेतवा नदी में ट्रांसफर किया जाना है, ताकि सिंचाई, पेयजल और सूखे से प्रभावित इलाकों को राहत मिल सके।
लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर परियोजना की कानूनी परमिशन खत्म हो चुकी है, तो निर्माण कार्य कैसे जारी है? पर्यावरण से जुड़े जानकारों का कहना है कि ऐसे बड़े प्रोजेक्ट में वन विभाग, पर्यावरण मंत्रालय और वन्यजीव से जुड़ी मंजूरियां बेहद जरूरी होती हैं। इनके बिना काम जारी रखना कानूनन गंभीर मामला माना जा सकता है।
इस परियोजना को लेकर पहले भी जंगल, वन्यजीव और पन्ना टाइगर रिजर्व पर असर की चिंता जताई जाती रही है। आशंका है कि निर्माण से हजारों पेड़ों, वन्यजीवों और नदी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार और परियोजना समर्थकों का तर्क है कि बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित इलाके के लिए यह योजना जीवनरेखा साबित हो सकती है।
अब मामला सिर्फ विकास बनाम पर्यावरण का नहीं, बल्कि कानूनी मंजूरी और प्रक्रिया की पारदर्शिता का भी बन गया है। आने वाले दिनों में इस प्रोजेक्ट पर अदालत, वन विभाग और सरकार की भूमिका बेहद अहम रहेगी।
channel_009 निष्कर्ष:
केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के लिए राहत का सपना मानी जा रही थी, लेकिन परमिशन और वन क्लीयरेंस को लेकर उठे सवालों ने इस मेगा प्रोजेक्ट को विवादों के केंद्र में ला दिया है।
आपकी राय क्या है — विकास परियोजनाओं में पर्यावरण क्लीयरेंस के बिना काम जारी रखना सही है या नहीं? कमेंट में बताइए।

CHANNEL009 Connects India
