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राजस्थान के श्रीकृष्णनगर गांव के जवान रामचंद्र गोरछियां (25) का जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी के दौरान निधन हो गया। बुधवार सुबह जब उनका पार्थिव शरीर गांव लाया गया, तो हर आंख नम हो गई। सबसे भावुक पल तब आया जब उनकी दो साल की बेटी ने उन्हें मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद सैकड़ों लोग रो पड़े।
सेना की कमी पर गुस्साए ग्रामीण
शहीद रामचंद्र का पार्थिव शरीर जब सामान्य वाहन (जीप्सी) से लाया गया और सेना की बटालियन व सैन्य वाहन नहीं पहुंचे, तो ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। टोल प्लाजा पर ग्रामीणों ने धरना दे दिया और शहीद को सैन्य सम्मान देने की मांग करने लगे। करीब चार घंटे तक प्रदर्शन चलता रहा।
प्रशासन की फुर्ती और सैन्य सम्मान
प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम, पुलिस अधिकारी और सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष को मौके पर भेजा। बातचीत के बाद पोकरण से सेना की एक बटालियन भेजी गई, जो शहीद को सैन्य ट्रक में उनके गांव लेकर गई। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई।
पूरे गांव में मातम, दुकानें रहीं बंद
श्रीलक्ष्मणनगर और श्रीकृष्णनगर में सभी दुकानें बंद रहीं। शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। लोगों ने अपने वीर जवान को श्रद्धांजलि दी।
बेटी ने दी मुखाग्नि, भावुक हुआ माहौल
शहीद रामचंद्र का विवाह 2021 में हुआ था। उनकी दो साल की बेटी ने ही उन्हें मुखाग्नि दी, जिससे माहौल और भी भावुक हो गया।
तिरंगा यात्रा और अंतिम विदाई
जब सैनिक सम्मान की पुष्टि हुई, तो 30-35 गांवों से युवक “जब तक सूरज चांद रहेगा, रामचंद्र तेरा नाम रहेगा” के नारे लगाते हुए तिरंगा यात्रा लेकर निकले। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने पुष्प अर्पित कर अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।
यह घटना पूरे क्षेत्र में गौरव, ग़म और गर्व का प्रतीक बन गई।
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