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दौसा उपचुनाव: किरोड़ीलाल मीणा का छलका दर्द

दौसा उपचुनाव और हार का असर
दौसा विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी और मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के भाई, जगमोहन मीणा की हार के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। किरोड़ीलाल मीणा ने इस हार पर अपनी पीड़ा जाहिर की है।

किरोड़ी लाल की भावुक शायरी
किरोड़ी लाल ने सोशल मीडिया पर अपने दर्द को बयां करते हुए एक शायरी शेयर की:
“सूरज मुझसे आंख मिलाते घबराता है, चांद सितारों की औकात है क्या?
खेला हूं मैं सदा आग से, अंगारों के गांव में।
मैं पलता-फलता आया जहरीली फुफकारों की छांव में।
इतने कांटे चुभे कि तलवे मेरे छलनी हो गए,
चलने का है जोश भला, फिर भी मेरे पावों में।
बहुत है बढ़िया कि मुझे मार दे, नहीं मौत में दम इतना।
कब्र-मजारों की औकात है क्या?”

हार के बाद छलका दर्द
इससे पहले भी किरोड़ी लाल ने चुनाव परिणाम के दिन अपनी पीड़ा जाहिर की थी। उन्होंने कहा, “गैरों में कहां दम था, मुझे तो सदा अपनों ने ही मारा।” उन्होंने हार के लिए पार्टी के अंदरूनी गुटबाजी और विश्वासघात को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि कुछ लोग “मेघनाथ” बनकर उनके “लक्ष्मण जैसे भाई” पर वार कर गए।

45 साल के संघर्ष का जिक्र
किरोड़ी लाल ने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा, “45 सालों से मैं राजनीति में जनता के लिए संघर्ष कर रहा हूं। पुलिस की मार झेली, जेल की सलाखों के पीछे रहा, पर जनता के लिए लड़ाई नहीं छोड़ी। दौसा उपचुनाव में भी पूरे जोश से चुनाव लड़ा, घर-घर जाकर वोट मांगे, लेकिन कुछ लोगों का दिल नहीं पसीजा।”

कांग्रेस की जीत
इस उपचुनाव में कांग्रेस के डीसी बैरवा ने बीजेपी के जगमोहन मीणा को 2300 वोटों से हराया। डीसी बैरवा को 75,536 और जगमोहन मीणा को 73,236 वोट मिले।

आगे बढ़ने का संकल्प
हार के बावजूद किरोड़ी लाल ने कहा कि वह न तो हताश हैं, न ही निराश। पराजय ने उन्हें सबक सिखाया है, लेकिन वह गरीबों, किसानों और मजदूरों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

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