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शहर में लगाए जा रहे स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर लोगों और बिजली कंपनी के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि नए स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है। उनका आरोप है कि मीटर तेज चल रहे हैं और वास्तविक खपत से ज्यादा यूनिट दर्ज कर रहे हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि सर्दियों के मौसम में जब पंखे, कूलर और एसी का उपयोग नहीं हो रहा, तब भी बिजली बिल ज्यादा आ रहे हैं। उनका सवाल है कि अगर सर्दी में इतना बिल आ रहा है, तो गर्मी में क्या स्थिति होगी।
वहीं बिजली कंपनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह डिजिटल और सटीक हैं। इनमें मानवीय गलती की संभावना नहीं रहती। अधिकारियों के अनुसार पहले कई बार औसत या अनुमानित रीडिंग के आधार पर बिल बनते थे, जिससे बिल कम आता था। अब स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत के अनुसार बिल बना रहे हैं, इसलिए लोगों को बिल ज्यादा लग रहा है। कंपनी का दावा है कि जहां भी शिकायत मिली, वहां मीटर की जांच कराई गई और वे सही पाए गए।
दक्षिण संभाग में अब तक लगभग 16 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में कुछ शिकायतें आई थीं, लेकिन अब स्थिति सामान्य है और उपभोक्ताओं को समय पर बिल मिल रहे हैं।
उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि भविष्य में इन मीटरों के जरिए प्री-पेड बिजली व्यवस्था लागू करने की योजना है। उनका आरोप है कि इससे बिजली महंगी हो सकती है और जो समय पर भुगतान नहीं करेगा, उसकी बिजली बंद हो सकती है।
फिलहाल प्रदेश के तीन संभागों में ही स्मार्ट मीटर लगाने का काम चल रहा है। उत्तर संभाग, जो ऊर्जा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में आता है, वहां अभी यह प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
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