नेशनल गेम्स में शानदार प्रदर्शन करने वाले कई भारतीय खिलाड़ियों को नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने डोपिंग नियम तोड़ने के कारण कड़ी सजा दी है। इनमें सबसे बड़ा नाम है चक्का फेंक (डिस्कस थ्रो) में स्वर्ण पदक जीतने वाले गगनदीप सिंह का। गगनदीप सिंह सेना का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने 12 फरवरी 2025 को उत्तराखंड में हुए राष्ट्रीय खेलों में पुरुषों की चक्का फेंक स्पर्धा में 55.01 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। लेकिन फाइनल के बाद हुई डोप टेस्ट में उनके नमूने में ‘टेस्टोस्टेरोन मेटाबोलाइट्स’ नामक प्रतिबंधित पदार्थ पाया गया। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्थायी निलंबन (सस्पेंशन) दे दिया गया।
नाडा के नियमों के मुताबिक, अगर कोई खिलाड़ी पहली बार डोपिंग करते पकड़ा जाता है, तो उसे अधिकतम 4 साल का प्रतिबंध मिल सकता है। लेकिन अगर खिलाड़ी 20 दिनों के अंदर अपना अपराध मान लेता है, तो उसकी सजा एक साल कम हो सकती है। गगनदीप ने भी यही किया, जिसके कारण उनकी सजा 4 साल से घटकर 3 साल हो गई। उनकी बैन अवधि 19 फरवरी 2025 से शुरू मानी जाएगी। इसके साथ ही उनका नेशनल गेम्स का गोल्ड मेडल भी वापस ले लिया जाएगा। उम्मीद है कि हरियाणा के निर्भय सिंह का रजत पदक अब स्वर्ण में बदल जाएगा।
गगनदीप के अलावा ट्रैक एंड फील्ड के दो और एथलीट – सचिन कुमार और जैनु कुमार – को भी यही रियायत मिली है। सचिन का तीन साल का बैन 10 फरवरी 2025 से लागू हो गया है, जबकि जैनु का 20 फरवरी से शुरू होगा। नाडा की इस कार्रवाई में जूडो खिलाड़ी मोनिका चौधरी और नंदिनी वत्स, पैरा पावरलिफ्टर उमेशपाल सिंह और सैमुअल वनलालतन्पुइया, भारोत्तोलक कविंदर, कबड्डी खिलाड़ी शुभम कुमार, पहलवान मुगाली शर्मा, वुशू खिलाड़ी अमन और राहुल तोमर, और एक नाबालिग पहलवान भी शामिल हैं। इन सभी खिलाड़ियों को भी एक-एक साल की सजा में छूट मिली है, क्योंकि उन्होंने आरोप मान लिए थे।
अधिकतर खिलाड़ियों को इस साल की शुरुआत में ही अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था। अब इन पर औपचारिक रूप से बैन लगा दिया गया है। यह घटना भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि डोपिंग न केवल करियर खत्म कर सकती है, बल्कि मेहनत से जीते मेडल भी छिन सकते हैं।
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