इस्लामाबाद – भारत के साथ हालिया सैन्य तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में बड़ा इजाफा किया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पाकिस्तान सरकार ने 2,550 अरब पाकिस्तानी रुपये (लगभग 9 अरब अमेरिकी डॉलर) रक्षा मद में आवंटित किए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा है।
🧾 संसद में पेश हुआ भारीभरकम बजट
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने 11 जून को संसद (नेशनल असेंबली) में कुल 17,573 अरब रुपये का वार्षिक बजट प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह बजट “ऐतिहासिक समय” में पेश किया गया है, जब देश ने “एकता और दृढ़ संकल्प” का परिचय दिया है।
रक्षा मद में किया गया यह आवंटन पिछले साल के 2,122 अरब रुपये से काफी अधिक है।
2023-24 में यह राशि 1,804 अरब थी, जिससे तुलना करने पर यह लगातार दूसरा वर्ष है जब रक्षा खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।
🛡️ क्या है रक्षा बजट में?
हालांकि पाकिस्तान सरकार ने रक्षा खर्च के विस्तृत विवरण को गोपनीय रखा है, पर विशेषज्ञों का मानना है कि इस राशि का एक बड़ा हिस्सा:
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गोलाबारूद और मिसाइल सिस्टम
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लड़ाकू टैंक और विमान
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सैन्य ढांचे के आधुनिकीकरण
पर खर्च किया जाएगा।
पारंपरिक रूप से पाकिस्तान की संसद में रक्षा बजट पर खुली बहस नहीं होती, इसलिए विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाते।
🔥 भारत-पाक तनाव और ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
वित्त मंत्री औरंगजेब ने बजट भाषण में भारत-पाक टकराव का भी जिक्र किया।
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22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद
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भारत ने 7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया
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इसमें पाकिस्तान और POK में 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया गया
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भारत ने इस कार्रवाई में 19 ब्रह्मोस मिसाइलों का उपयोग किया
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पाकिस्तान की ओर से जवाबी हमले की कोशिशों को भारत ने कड़ी कार्रवाई से निष्फल कर दिया
इस सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को काफी रणनीतिक नुकसान हुआ, खासकर एयरबेस और सैन्य लॉजिस्टिक्स को भारी क्षति पहुंची।
📉 क्या दर्शाता है यह बढ़ा हुआ बजट?
यह बजट स्पष्ट संकेत देता है कि पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने पर तेजी से जोर दे रहा है, खासकर भारत से लगातार मिल रहे दबाव और आतंकी ढांचों पर हुई कार्रवाई के बाद।
यह फैसला:
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आंतरिक अस्थिरता और सीमा पार तनाव के माहौल में आया है
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और यह दिखाता है कि पाकिस्तान भारत के सैन्य संदेश को गंभीरता से ले रहा है
🧭 निष्कर्ष
पाकिस्तान का यह नया रक्षा बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि यह उसकी सुरक्षा नीति और रणनीतिक प्राथमिकताओं का प्रतीक है।
भारत के ऑपरेशन सिंदूर के प्रभाव के बाद यह वृद्धि पाकिस्तान की एक रक्षात्मक मुद्रा और जवाबी तैयारी को दर्शाती है।
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