नई दिल्ली / सिंध: पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बदीन जिले में रविवार को अज्ञात हमलावरों द्वारा किए गए हमले में लश्कर-ए-तैयबा का एक शीर्ष कमांडर सैफुल्लाह मारा गया। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह वही व्यक्ति है जो भारत में कई आतंकी घटनाओं का साजिशकर्ता रहा है।
कई नामों से कुख्यात था सैफुल्लाह
सैफुल्लाह को उसके विभिन्न नामों — विनोद कुमार, मोहम्मद सलीम, वाजिद, सलीम भाई, वनियाल और खालिद — से भी जाना जाता था। वह लश्कर के लिए नेपाल में आतंकी मॉड्यूल संचालित करता था और भारत में घुसपैठ, फंडिंग और भर्ती का ज़िम्मेदार था। उसके तार जमात-उद-दावा जैसे प्रतिबंधित संगठनों से भी जुड़े थे।
कैसे हुआ सैफुल्लाह का खात्मा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैफुल्लाह रविवार को सिंध के माटली इलाके में अपने घर से बाहर निकला, तभी अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे गोली मार दी। यह हमला उस वक्त हुआ जब वह एक चौराहे पर पहुँचा था। अब तक इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है।
आतंकी गतिविधियों का लंबा इतिहास
सैफुल्लाह भारत में रामपुर सीआरपीएफ कैंप हमला, नागपुर में आरएसएस मुख्यालय पर हमला, और IISC बेंगलुरु में बम धमाके जैसे मामलों में संदिग्ध रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि वह नेपाल के जरिए आतंकियों को भारत में प्रवेश कराने और आर्थिक मदद जुटाने में अहम भूमिका निभाता था।
निजी जीवन और नेपाल कनेक्शन
सैफुल्लाह ने नेपाल की नागरिक नगमा बानू से विवाह किया था। वह नेपाल और पाकिस्तान के जरिए आतंकी गतिविधियों के लिए नेटवर्क और संसाधनों की व्यवस्था करता था। पाकिस्तान सरकार द्वारा उसे कथित तौर पर सुरक्षा भी प्रदान की गई थी, जिससे उसका मारा जाना कई सवाल खड़े करता है।
भारत के लिए यह क्या मायने रखता है?
सैफुल्लाह की मौत से भारत में आतंकी नेटवर्क की कमर टूटने की संभावना है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना लश्कर-ए-तैयबा के अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल के लिए एक बड़ा झटका है। हालांकि, अब यह देखना होगा कि इस घटना के बाद भारत की सीमाओं पर आतंकी गतिविधियों पर क्या असर पड़ता है।
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