जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत द्वारा अपनाए गए सख्त रुख से पाकिस्तान में हलचल मच गई है। इसी संदर्भ में पाकिस्तान नेशनल असेंबली का एक विशेष सत्र बुलाया गया, जिसकी अध्यक्षता स्पीकर सरदार अयाज सादिक ने की।
सत्र की शुरुआत में भारत के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसे संसदीय कार्य मंत्री डॉ. तारिक फजल चौधरी ने पेश किया। प्रस्ताव में भारत की कड़ी निंदा की गई। यह सत्र उस समय बुलाया गया जब पाकिस्तान को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा महसूस हो रहा है।
इस विशेष बैठक में तमाम राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद थे, और चर्चा का केंद्र पूरी तरह से भारत रहा। इसी दौरान पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के वरिष्ठ नेता उमर अयूब ने भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान देते हुए कहा, “हम पहले मारेंगे, बाद में सोचेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत को कड़ा जवाब देना जरूरी है, और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की नीतियों को कमजोर बताया।
अयूब ने भारत के मिसाइल परीक्षणों और संभावित सैन्य कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत शिंक्यारी या चखोटी जैसे क्षेत्रों में हमला कर सकता है, और पाकिस्तान को उसके “चेहरे तोड़ने” जैसा जवाब देना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना हिटलर से करते हुए खुद को पाकिस्तान का “चर्चिल” बताया।
साफ है कि भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ लिए गए कड़े फैसलों, विशेष रूप से सिंधु जल संधि की समीक्षा और निलंबन के बाद पाकिस्तान दबाव में है। पाकिस्तानी नेतृत्व की ओर से लगातार भड़काऊ बयान दिए जा रहे हैं, जिनमें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल तक की धमकियाँ भी शामिल हैं।
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