वेटिकन सिटी:
ईसाई समुदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप फ्रांसिस के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां बेहद पारंपरिक और भावनात्मक होती हैं। इस पूरे आयोजन में कुल 9 दिनों का विशेष शोककाल शामिल है, जिसे पारंपरिक रूप से “नोवेन्डिएल” कहा जाता है। इस दौरान श्रद्धालुओं को पोप के दर्शन का अवसर दिया जाता है।
नोवेन्डिएल: शोक की पवित्र अवधि
नोवेन्डिएल नाम की यह रस्म पोप की मृत्यु के बाद शुरू होती है, जिसमें उनके लिए विशेष प्रार्थनाएं और सेवाएं आयोजित की जाती हैं। इस समय पोप फ्रांसिस के पार्थिव शरीर को सेंट पीटर्स बेसिलिका में पोप की पारंपरिक पोशाक में दर्शन के लिए रखा जाएगा।
पोप फ्रांसिस की अंतिम इच्छा
पोप फ्रांसिस ने स्पष्ट किया था कि उनका अंतिम संस्कार एक सामान्य पादरी की तरह किया जाए। वे नहीं चाहते कि उन्हें तीन परतों वाले पारंपरिक ताबूत में रखा जाए, जो कि पोप्स के अंतिम संस्कार की पुरानी परंपरा रही है। इसके बजाय उन्होंने साधारण लकड़ी के ताबूत में दफनाए जाने की इच्छा जताई थी।
दफन की जगह का चयन
पोप फ्रांसिस ने अपने विश्राम स्थल के रूप में सांता मारिया मैगीगोर बेसिलिका को चुना, जो रोम का एक प्रतिष्ठित चर्च है और जहां वे अक्सर प्रार्थना के लिए जाया करते थे। पारंपरिक तौर पर पोप को वेटिकन ग्रोटोज में दफनाया जाता है, लेकिन फ्रांसिस ने इसमें भी बदलाव की मांग की थी।
ऐतिहासिक परंपराएं और बदलाव
16वीं से 19वीं शताब्दी तक, पोप के शरीर को संरक्षित करने के लिए उनके कुछ अंग जैसे दिल, लीवर, स्प्लीन और पेनक्रियाज निकाल लिए जाते थे। आज भी 22 पोप्स के अंग रोम के एक चर्च में संगमरमर के पात्रों में संरक्षित हैं। हालांकि पोप फ्रांसिस ने इस परंपरा को 2024 में औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया था।
निष्कर्ष: परंपरा और सरलता का संगम
पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार की तैयारियां यह दिखाती हैं कि कैसे वे परंपरा और सरलता के बीच संतुलन चाहते थे। उनका यह फैसला न केवल उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक नई दिशा भी तय कर सकता है।
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