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पोप फ्रांसिस नहीं रहे: विश्व ने खोया शांति का मसीहा

pope francis

रोम, 21 अप्रैल 2025 — आज सुबह रोम के स्थानीय समय अनुसार 7:35 बजे, वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस ने 88 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से डबल निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और गुर्दे की जटिलताओं से पीड़ित थे। उनका निधन कासा सांता मार्टा में हुआ, जहाँ वे पिछले कुछ समय से उपचाराधीन थे।

जीवन भर प्रभु यीशु मसीह की सेवा में समर्पित रहे पोप फ्रांसिस को पूरी दुनिया में शांति, करुणा और सामाजिक न्याय के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने सदैव हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बनकर, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया।

विश्व नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक संदेश:

“पोप फ्रांसिस के निधन की खबर से गहरा दुख हुआ। उन्होंने मानवता के लिए जो सेवा की, वह अमिट है। उनका जीवन करुणा, विनम्रता और आध्यात्मिक साहस का प्रतीक रहा। भारत के लोगों के प्रति उनका स्नेह हमेशा याद रखा जाएगा।”

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस:

“कल ही उनसे मिलने का सौभाग्य मिला, वे अत्यंत दुर्बल थे, लेकिन उनकी आँखों में अभी भी वह आध्यात्मिक चमक थी। कोविड के समय उनके द्वारा दिया गया प्रवचन मेरे हृदय में सदा गूंजता रहेगा।”

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों:

“ब्यूनस आयर्स से रोम तक, पोप फ्रांसिस ने चर्च को गरीबों के लिए आशा का केंद्र बनाया। उनकी शिक्षाएं युगों तक जीवित रहेंगी।”

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी:

“उन्होंने हमें यह सिखाया कि विनम्रता और प्रेम के साथ हम दुनिया को बदल सकते हैं। हम उनके मार्गदर्शन को नहीं भूलेंगे।”

अंतिम क्षणों में भी सक्रिय

पोप फ्रांसिस ने निधन से एक दिन पहले भी सेंट पीटर स्क्वायर में ईस्टर संडे पर लोगों को आशीर्वाद दिया और अमेरिका के उपराष्ट्रपति से मुलाकात की। यह उनकी समर्पित आत्मा का प्रमाण है कि बीमारी की अवस्था में भी वे मानवता की सेवा में लगे रहे।

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