पेरिस:
फ्रांस में गर्मी की लहर ने विकराल रूप धारण कर लिया है। देश के 101 में से 84 प्रशासनिक क्षेत्रों में हीटवेव अलर्ट जारी किया गया है। جنوب مغربی علاقے कॉर्बिएरे (Corbières) में भीषण गर्मी के बीच जंगलों में आग लग गई, जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया।
इस आग के चलते प्रशासन ने एक कैंपसाइट और एक ऐतिहासिक एबी (गिरजाघर परिसर) को एहतियातन खाली कराया है।
दक्षिण फ्रांस में सबसे ज्यादा असर
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मौसम विभाग Météo-France के अनुसार, रविवार को फ्रांस के दक्षिणी इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस (104°F) से पार गया।
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Grospierres नामक छोटे शहर में 40.9°C, Vinsobres गांव में 40.1°C, और Cadenet में 39.9°C तापमान दर्ज किया गया।
सोमवार से बुधवार तक लहर पूरे फ्रांस में फैलने की आशंका है, खासतौर पर मेडिटेरेनियन तटीय क्षेत्रों में जहां तापमान 41°C (105.8°F) तक पहुंच सकता है।
सरकारी अलर्ट और कदम
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इंटीरियर मिनिस्टर ब्रूनो रेटायो (Bruno Retailleau) ने बताया कि रविवार को एक आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें स्वास्थ्य से जुड़े दिशा-निर्देशों की समीक्षा की गई।
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कई शहरों में स्कूलों को सप्ताह की शुरुआत में ही बंद कर दिया गया है, ताकि बच्चों को गर्मी से बचाया जा सके।
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बोर्दो शहर में, जहां तापमान 36 डिग्री तक पहुंच गया, परिवार झील किनारे पाइन के पेड़ों की छांव में शरण लेते दिखे।
एक स्थानीय निवासी, एवन बर्नार्ड ने कहा:
“घर में रहना नर्क जैसा है। फ्लैट में हम अंधेरे में रहते हैं, क्योंकि वहां गर्मी भट्ठी जैसी है।”
गर्मी की यह लहर यूरोप भर में फैली
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फ्रांस के अलावा इटली, पुर्तगाल और स्पेन भी इस चपेट में हैं।
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स्पेन के एल ग्रानाडो में शनिवार को 46°C (114.8°F) दर्ज किया गया।
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पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन सहित कई इलाके रेड अलर्ट पर हैं।
‘हीट डोम’ बना वजह
इस बार की गर्मी एक हीट डोम (heat dome) के कारण है – यानी एक ऐसा शक्तिशाली वायुमंडलीय दबाव जो गर्म हवा को फंसा लेता है और ठंडी प्रणालियों को अंदर आने नहीं देता।
निष्कर्ष:
फ्रांस समेत दक्षिणी यूरोप के कई देश जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव झेल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसी चरम मौसमी घटनाएं और आम हो जाएंगी, जिससे स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
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