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अब क्षेत्रीय गानों पर बड़ा दांव
5,900 करोड़ के म्यूजिक बाजार में नई रणनीति, स्ट्रीमिंग से घटती कमाई के बीच कंपनियों का फोकस बदला
भारत की बड़ी म्यूजिक कंपनियां अब तेजी से क्षेत्रीय यानी रीजनल गानों की तरफ रुख कर रही हैं। घरेलू म्यूजिक इंडस्ट्री का बाजार करीब ₹5,900 करोड़ तक पहुंच चुका है, लेकिन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स से होने वाली कमाई में गिरावट के कारण कंपनियां अपनी रणनीति बदल रही हैं।
इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, भोजपुरी, हरियाणवी, पंजाबी, मराठी, बंगाली और दक्षिण भारतीय भाषाओं के गानों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। यूट्यूब, इंस्टाग्राम रील्स और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर रीजनल गाने करोड़ों व्यूज हासिल कर रहे हैं।
म्यूजिक कंपनियों का मानना है कि क्षेत्रीय कंटेंट में दर्शकों का जुड़ाव ज्यादा मजबूत होता है और कम लागत में बड़े स्तर पर पहुंच बन जाती है। इसी वजह से अब नए कलाकारों और लोकल म्यूजिक प्रोडक्शन में निवेश बढ़ाया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पहले कंपनियों का फोकस बॉलीवुड और हिंदी पॉप म्यूजिक पर ज्यादा रहता था, लेकिन अब डिजिटल दौर में रीजनल कंटेंट तेजी से कमाई और लोकप्रियता दोनों दिला रहा है।
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स से प्रति गाना कम रेवेन्यू मिलने के कारण कंपनियां लाइव शो, शॉर्ट वीडियो, ब्रांड पार्टनरशिप और लोकल ऑडियंस बेस पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। सोशल मीडिया पर भी “Regional Music Boom” तेजी से चर्चा में है।
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