अगर मौसम बदलते ही आपकी आंखों में खुजली हो रही है, बार-बार छींकें आ रही हैं या नाक बंद हो रही है, तो हो सकता है आपको एलर्जी हो गई हो। मौसम बदलने के समय हवा में मौजूद परागकण, धूल, फफूंद और पालतू जानवरों की रूसी जैसे एलर्जी फैलाने वाले तत्व ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं, जिससे ये दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
मौसम बदलते समय एलर्जी क्यों होती है?
जब मौसम बदलता है तो तापमान, नमी और हवा की दिशा में बदलाव होता है। इससे वातावरण में परागकण, धूल और फफूंद के कण ज़्यादा फैलते हैं। वसंत और गर्मी में पेड़ों और घास से निकलने वाला पराग एलर्जी का मुख्य कारण बनता है, जबकि बारिश के मौसम में फफूंद के कण बढ़ जाते हैं। घर के अंदर भी धूल और पालतू जानवरों की रूसी से एलर्जी हो सकती है, खासकर जब घर में हवा का आना-जाना कम हो।
एलर्जी की पहचान कैसे करें?
एलर्जी की पुष्टि के लिए डॉक्टर कुछ टेस्ट कर सकते हैं:
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स्किन प्रिक टेस्ट: त्वचा पर एलर्जी करने वाले तत्व की थोड़ी मात्रा लगाई जाती है। अगर दाने या सूजन होती है तो एलर्जी की पुष्टि हो जाती है।
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ब्लड टेस्ट: खून की जांच से भी एलर्जी का पता चलता है, लेकिन यह तरीका थोड़ा महंगा और कम सटीक होता है।
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IgE एंटीबॉडी टेस्ट: यह टेस्ट उन लोगों के लिए अच्छा है जो स्किन टेस्ट नहीं करवा सकते।
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कंपोनेंट रिजॉल्व्ड डायग्नोस्टिक टेस्ट: इसमें यह पता चलता है कि शरीर किस खास चीज से एलर्जी कर रहा है।
एलर्जी के लक्षण क्या होते हैं?
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नाक का बार-बार बंद होना या बहना
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लगातार छींक आना
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आंखों और नाक में खुजली
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आंखों से पानी आना, लालिमा और सूजन
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गले में खराश और खांसी
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सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत, छाती में जकड़न या घरघराहट
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कुछ लोगों को त्वचा पर खुजली, दाने या शरीर के हिस्सों में सूजन (एंजियोएडेमा) भी हो सकती है।
ध्यान दें:
सांस की नली को प्रभावित करने वाले वायरस के संक्रमण में भी कुछ ऐसे ही लक्षण दिख सकते हैं, लेकिन उसमें बुखार, बदन दर्द, थकान और कमजोरी भी आमतौर पर महसूस होती है।
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