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राजस्थान के सीकर और झुंझुनूं जिलों के लिए दूध उत्पादकों को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 1 अगस्त 2025 से सरस डेयरी पलसाना में दूध अब कैनों में नहीं, बल्कि टैंकरों से पहुंचेगा।
✅ अब कैनलेस होगी डेयरी
सरस डेयरी पलसाना को अब “कैनलेस डेयरी” बनाया जा रहा है। इसका मतलब है कि अब दूध को पुराने तरीके से कैनों में नहीं, बल्कि टैंकरों और बीएमसी (बल्क मिल्क कूलर) के जरिए एकत्र किया जाएगा।
इससे दूध की गुणवत्ता बनी रहेगी और डेयरी के खर्चों में भी कमी आएगी।
📢 डेयरी प्रशासन का क्या कहना है?
डेयरी एमडी कमलेश कुमार मीणा ने बताया कि यह फैसला आरसीडीएफ जयपुर के निर्देश पर लिया गया है। पहले से ही इस योजना पर काम चल रहा था और अब तक क्षेत्र में करीब 150 बीएमसी लग चुकी हैं, और 25 और बीएमसी लगाई जा रही हैं।
अब पशुपालकों का दूध सीधा डेयरी नहीं जाकर, पास की बीएमसी में भेजा जाएगा।
🏛️ विधानसभा में भी उठा था मामला
2019 में डेयरी को कैनलेस बनाने की योजना बनी थी और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से इसके लिए पैसा भी आया था। लेकिन काम में ढिलाई के कारण योजना पूरी नहीं हो सकी।
इसको लेकर खंडेला विधायक सुभाष मील ने विधानसभा में सवाल भी उठाया था।
🏭 डेयरी को क्या लाभ होगा?
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अब तक 8 रूटों से कैनों के जरिए दूध आता था, जो 31 जुलाई से बंद कर दिए जाएंगे।
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इससे ट्रांसपोर्ट, कैनों की सफाई और हैंडलिंग का खर्च बचेगा।
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साथ ही दूध समय पर बीएमसी तक पहुंचने से उसकी गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी।
🔚 निष्कर्ष
अब दूध उत्पादकों को दूध की कैन लेकर नहीं जाना होगा। टैंकर और बीएमसी सिस्टम से काम आसान हो जाएगा और डेयरी भी आधुनिक होगी। यह बदलाव डेयरी सेक्टर के लिए फायदेमंद और समय की मांग है।
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