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बस्तर को मिली जनजातीय गौरव वाटिका की सौगात, कुम्हड़ाकोट में हुआ लोकार्पण

बस्तरवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। शहर की भीड़, धूल और शोर से दूर प्रकृति के बीच सुकून देने वाली जनजातीय गौरव वाटिका का लोकार्पण कुम्हड़ाकोट में किया गया। इस वाटिका का उद्घाटन उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप और विधायक किरण सिंह देव ने किया।


जनजातीय संस्कृति और प्रकृति का संगम

करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह वाटिका बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य को समर्पित है। यह जगह अब आम लोगों के लिए खोल दी गई है और भविष्य में बस्तर के एक नए पर्यटन केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है।

लोकार्पण के बाद अतिथियों ने वाटिका का भ्रमण किया। इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी मौजूद रहे।


25 एकड़ में फैली भव्य वाटिका

वन मंडलाधिकारी ने बताया कि यह वाटिका करीब 25 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है। शुरुआत में इसे हेल्थ पार्क के रूप में बनाने की योजना थी, लेकिन बाद में इसे एक बड़े और सुंदर पार्क के रूप में विकसित किया गया।


स्व-सहायता समूहों को आर्थिक मदद

कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री और वन मंत्री ने स्व-सहायता समूहों और हितग्राहियों को 1 करोड़ 22 लाख रुपये से ज्यादा की सहायता राशि के चेक वितरित किए।

  • महिला स्व-सहायता समूहों को 1 करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक का ऋण

  • काजू प्रसंस्करण के लिए एक समूह को 50 लाख रुपये

  • गाय पालन के लिए 34 लाख रुपये

  • इमली संग्रहण और प्रसंस्करण के लिए 13–13 लाख रुपये

  • दोना-पत्तल निर्माण के लिए 10 लाख रुपये का ऋण दिया गया

इसके अलावा, तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत एक परिवार को 2 लाख रुपये की बीमा सहायता भी दी गई।


वाटिका की खास सुविधाएं

जनजातीय गौरव वाटिका में लोगों के लिए कई आकर्षक सुविधाएं तैयार की गई हैं—

  • 1700 मीटर लंबा वॉकिंग ट्रेल

  • योगा शेड और योगा जोन

  • ओपन जिम

  • गपशप जोन

  • पारिवारिक आयोजनों के लिए 5 पगोड़ा

  • तालाब और आइलैंड

  • पार्किंग और शौचालय की सुविधा

पूरे पार्क को इको-फ्रेंडली और प्लास्टिक फ्री जोन के रूप में विकसित किया गया है। भविष्य में यहां ट्री हाउस और एडवेंचर स्पोर्ट्स शुरू करने की भी योजना है।


महिला समूहों से संवाद

कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने महिला समूहों से बातचीत कर इमली और काजू के प्रसंस्करण, बिक्री और बाजार व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा की।

यह जनजातीय गौरव वाटिका बस्तर की पहचान, संस्कृति और विकास को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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