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बांग्लादेश में हिंदू नेताओं की हत्या से मचा बवाल, भारत ने जताई कड़ी नाराज़गी

bangladeshi hindu neta ki haitya

ढाका/नई दिल्ली – बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के नेताओं की सिलसिलेवार हत्याओं ने देश के भीतर और बाहर गहरी चिंता पैदा कर दी है। हाल ही में दिनाजपुर जिले में हिंदू नेता भबेश चंद्र रॉय की बर्बर हत्या के बाद भारत ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रति नाराज़गी जताई है और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

कैसे हुई भबेश रॉय की हत्या?

58 वर्षीय भबेश चंद्र रॉय, बांग्लादेश पूजा उद्यापन परिषद की बिराल इकाई के उपाध्यक्ष थे। वह अपने घर पर थे जब उन्हें शाम करीब 4:30 बजे एक संदिग्ध कॉल आया। थोड़ी ही देर बाद, चार अज्ञात हमलावर दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर पहुंचे और उन्हें जबरन उठा ले गए। बाद में उनका शव पास के नाराबारी गांव में पाया गया, जिस पर हिंसा के स्पष्ट निशान थे।

भारत ने जताई सख्त आपत्ति

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने घटना को “चिंताजनक और सुनियोजित हमला” बताया। उन्होंने कहा, “यह अल्पसंख्यकों पर योजनाबद्ध हमलों की प्रवृत्ति को दर्शाता है। भारत चाहता है कि बांग्लादेश सरकार इस हत्या की निष्पक्ष और त्वरित जांच करे।”

कांग्रेस का हमला, मोदी सरकार पर उठे सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बांग्लादेश के साथ कूटनीतिक नीति विफल रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो महीनों में हिंदू समुदाय पर 76 हमले हुए, जिनमें 23 लोगों की मौत हुई — ये आंकड़े संसद में दिए गए आधिकारिक उत्तरों पर आधारित हैं।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सरकार से “सिर्फ निंदा नहीं, बल्कि ठोस कूटनीतिक कदम उठाने” की मांग की।

अन्य हिंदू नेताओं की भी हुई हत्याएं

  1. हरधन रॉय – अगस्त 2024 में रंगपुर में गोली मार दी गई, वे वार्ड पार्षद और अवामी लीग से जुड़े थे।

  2. काजल रॉय – भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला।

  3. प्रणब घोष – राजनीतिक हिंसा के दौरान मारे गए।

  4. राजेश्वर दास – 2024 की हिंसा की लहर में जान गंवाई।

क्या कहती है बांग्लादेश सरकार?

अब तक की रिपोर्टों में यह साफ नहीं है कि अंतरिम सरकार ने इस विषय पर कोई स्पष्ट बयान दिया हो। आलोचकों का कहना है कि प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद से बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता ने अल्पसंख्यकों की स्थिति को और कमजोर कर दिया है।

भय में जी रहा है हिंदू समुदाय

भबेश रॉय के करीबी बताते हैं कि वे धार्मिक सौहार्द और सामाजिक कार्यों के प्रति बेहद सक्रिय थे। उनकी हत्या ने समुदाय में भय और असुरक्षा की लहर दौड़ा दी है।


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