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राजस्थान के बाड़मेर जिले के झाक गांव में स्थित करीब 600 साल पुराने झाक मठ के महंत पारसनाथ (57) का शव गुरुवार सुबह मठ के टांके में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।
कुछ समय से चल रहा था इलाज
पुलिस के अनुसार महंत पारसनाथ का कुछ समय से मानसिक बीमारी का इलाज चल रहा था। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें जोधपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद वे मठ लौट आए थे, लेकिन उसके बाद से वे मानसिक तनाव में बताए जा रहे थे।
रात में पैसों को लेकर हुई थी बात
महंत के साथ उनके शिष्य रमेश गिरी और एक अन्य युवक मठ में रहते थे। पूछताछ में पता चला कि रात करीब डेढ़ बजे तक महंत ने अपने इलाज के लिए लिए गए पैसों का हिसाब बताया और उन्हें वापस करने की बात कही। इसके बाद सभी सो गए। सुबह जब देखा गया तो उनका शव टांके में मिला।
पुलिस और एफएसएल टीम ने की जांच
घटना की जानकारी मिलते ही जिला पुलिस अधीक्षक, एसडीएम, थाना अधिकारी और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। एफएसएल टीम ने भी घटनास्थल से सबूत जुटाए और मामले की जांच शुरू की।
पोस्टमार्टम नहीं कराया गया
महंत के भाई के भुरटिया गांव से आने के बाद सुबह करीब 11:30 बजे शव को टांके से बाहर निकाला गया। परिजनों और साधु-संतों की सहमति से पोस्टमार्टम नहीं कराया गया और शव उन्हें सौंप दिया गया।
30 साल से थे मठ के महंत
महंत पारसनाथ पिछले करीब 30 वर्षों से झाक मठ के महंत थे। उन्होंने यहां संचालित पद्मनाथ गोशाला के विकास और धार्मिक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपना जीवन गोसेवा, धर्म और समाज सेवा के लिए समर्पित किया था।
संतों और ग्रामीणों ने दी श्रद्धांजलि
मठ परिसर में महंत की पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए रखी गई। भजन-कीर्तन के बीच हजारों श्रद्धालुओं और साधु-संतों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। बाद में पारंपरिक विधि-विधान के साथ मठ परिसर में ही उन्हें समाधि दी गई।
पुलिस के अनुसार यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है और मर्ग दर्ज कर जांच की जा रही है।
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