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बिहार विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन सदन में खूब हंगामा हुआ। विकास से जुड़े मुद्दों की जगह “लव जिहाद” और “धर्म परिवर्तन” पर तेज बहस देखने को मिली। बीजेपी के 12 विधायकों ने राज्य में सख्त कानून बनाने की मांग उठाई, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक मुद्दा बताया।
बीजेपी विधायकों की मांग
बीजेपी विधायकों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए कहा कि बिहार में ईसाई और मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है, जो चिंता का विषय है।
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विधायक वीरेंद्र कुमार ने कहा कि देश में ईसाइयों की वृद्धि दर 15.52% है, जबकि बिहार में यह 143% से ज्यादा बताई जा रही है।
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उनका दावा है कि राज्य में 5,000 से अधिक चर्च बन चुके हैं।
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उन्होंने इसे सामाजिक ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मुद्दा बताया।
हिसुआ के विधायक अनिल कुमार ने कहा कि सीमांचल जैसे सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम आबादी भी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने मांग की कि धर्म परिवर्तन रोकने के लिए जल्द कड़ा कानून बनाया जाए।
आरक्षण और धर्म परिवर्तन पर सवाल
जाले के विधायक जीवेश मिश्रा ने कहा कि जब जाति नहीं बदली जा सकती, तो धर्म कैसे बदला जा सकता है? उन्होंने सवाल उठाया कि धर्म बदलने के बाद लोग आरक्षण का लाभ कैसे लेते हैं।
उन्होंने अपने क्षेत्र का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि एक नाबालिग लड़की को एक व्यक्ति बहला-फुसलाकर ले गया।
इसी तरह, विधायक मिथिलेश तिवारी ने भी अपने क्षेत्र में धर्म परिवर्तन और अपराध से जुड़े मामलों का जिक्र किया।
सरकार का जवाब
प्रभारी गृह मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि फिलहाल धर्म परिवर्तन रोकने के लिए नया कानून लाने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है। उन्होंने बताया कि अगर कोई गैरकानूनी काम होता है, तो मौजूदा कानून के तहत कार्रवाई की जाती है।
हालांकि, सदन में हुए हंगामे के बाद स्पीकर ने सरकार से पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा करने को कहा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने इस मुद्दे को विकास से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि जनता के असली मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए और समाज को बांटने की राजनीति से बचना चाहिए।
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