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महाराष्ट्र की राजनीति में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भाजपा को हराने के लिए एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) ने आपसी मतभेद भुलाकर हाथ मिला लिया है। इस गठबंधन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट, शरद पवार और अजित पवार, भी शामिल हैं।
बारशी में बना खास गठबंधन
सोलापुर जिले के बारशी क्षेत्र में भाजपा के खिलाफ यह नया गठबंधन बनाया गया है। यहां शिवसेना के दोनों गुट और NCP के दोनों धड़े मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। खास बात यह है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे खुद उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं के साथ मंच पर नजर आए और इस गठबंधन के समर्थन में प्रचार भी किया।
स्थानीय चुनावों के लिए एकजुटता
7 फरवरी को सोलापुर जिले की 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए मतदान होना है। इसी चुनाव को देखते हुए स्थानीय स्तर पर यह गठबंधन बनाया गया है। राज्य स्तर पर भले ही ये पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ हों, लेकिन भाजपा को रोकने के लिए स्थानीय राजनीति में साथ आई हैं।
शिंदे ने किया मंच साझा
बारशी तालुका के वैराग में हुई चुनावी रैली में एकनाथ शिंदे और उद्धव गुट के नेता एक साथ नजर आए। इस रैली में शिवसेना (उबाठा) के विधायक दिलीप सोपाल भी मौजूद थे। इस दृश्य ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
भविष्य की राजनीति पर असर?
उद्धव गुट के स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह गठबंधन सिर्फ स्थानीय चुनावों तक सीमित है और इसे राज्य स्तर की राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो महाराष्ट्र के अन्य इलाकों में भी भाजपा के खिलाफ ऐसे गठबंधन देखने को मिल सकते हैं।
कुल मिलाकर, बारशी का यह गठबंधन आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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