भारतीय खेल जगत आज गहरे दुख में है। कोलकाता से एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई है—पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी वेस पेस का 80 साल की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कोलकाता के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। वेस पेस भारत के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में थे, जिन्होंने ओलंपिक में देश का नाम रोशन किया। उन्होंने 1972 में जर्मनी के म्यूनिख में हुए ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा बनकर खेला था। उस समय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया था। पेस मिडफील्डर पोजीशन पर खेलते थे और मैदान पर अपनी तेजी व खेल की समझ के लिए मशहूर थे।
खेल के अलावा, वेस पेस ने पढ़ाई और चिकित्सा के क्षेत्र में भी अहम योगदान दिया। उन्होंने 1964-65 के दौरान कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से प्री-मेडिकल की पढ़ाई की और फिर लखनऊ के ला मार्टिनियर कॉलेज में अपनी पढ़ाई जारी रखी। वह स्पोर्ट्स मेडिसिन के डॉक्टर भी थे और लंबे समय तक बीसीसीआई के डोपिंग-रोधी विभाग में काम किया। उनका निजी जीवन भी खेल से जुड़ा रहा। वेस पेस ने जेनिफर डटन से विवाह किया, जो बंगाली लेखक माइकल मधुसूदन दत्त की परपोती थीं। जेनिफर खुद एक बेहतरीन बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं। उन्होंने 1972 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भारतीय नेशनल बास्केटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व किया और 1982 में नेशनल टीम की कप्तानी भी की।
वेस पेस को टेनिस प्रेमी भी अच्छी तरह जानते हैं, क्योंकि वे भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस के पिता थे। लिएंडर ने कई बार भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय टेनिस जगत में रोशन किया और देश के लिए ओलंपिक पदक भी जीता।
वेस पेस के निधन से भारतीय खेल जगत ने न केवल एक बेहतरीन खिलाड़ी, बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व को खो दिया है। उनकी खेल उपलब्धियां और खेल के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।
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