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16 अप्रैल को भारतीय रेलवे के 172 साल पूरे हो गए हैं। देश की पहली यात्री ट्रेन 1853 में मुंबई के बोरीबंदर से ठाणे के बीच चली थी। लेकिन इस सफर में बुरहानपुर स्टेशन का भी खास इतिहास रहा है। करीब 157 साल पहले यहां ट्रेनें रुकने लगी थीं।
इतिहासकार होशंग हवलदार के मुताबिक, 1866 में बुरहानपुर में रेलवे पटरी बिछी और 1868 में गाड़ियों का स्टॉपेज शुरू हो गया था। शुरुआती समय में 8 गाड़ियों का स्टॉपेज बुरहानपुर में हुआ करता था। इनमें पैसेंजर ट्रेन, पंजाब मेल, कलकत्ता, लाहौर एक्सप्रेस, कटनी-भुसावल पैसेंजर, इटारसी-भुसावल पैसेंजर और दो मालगाड़ियाँ शामिल थीं। मालगाड़ियों के आधे डिब्बों में यात्री भी सफर करते थे।
पहले कपास, फिर केला बनी बड़ी फसल
बुरहानपुर कपास की बड़ी मंडी हुआ करती थी। कपास की गठानों को भेजने के लिए यहां ट्रेनों का स्टॉपेज जरूरी था। इसके बाद केले की सप्लाई भी ट्रेन से होने लगी।
स्टेशन की बदली तस्वीर
पहले बुरहानपुर रेलवे स्टेशन की हालत बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन 2014 के बाद देशभर के 7568 स्टेशनों में से 104 को मॉडल स्टेशन बनाने की योजना में इसे भी शामिल किया गया। इसके बाद स्टेशन का पूरा रूप बदल गया।
अब बुरहानपुर स्टेशन पर:
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रोज़ाना 6000 यात्री सफर करते हैं
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45 गाड़ियों का आवागमन होता है
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इनमें से करीब 30 ट्रेनों का यहां स्टॉपेज होता है
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स्टेशन को चार लेन तक बढ़ाने की योजना है
बुरहानपुर, महाराष्ट्र की सीमा खत्म होने के बाद मध्यप्रदेश का पहला स्टेशन है जो भुसावल रेलवे मंडल के अंतर्गत आता है। यहां से देश के कई हिस्सों में सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी उपलब्ध है।
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