लखनऊ: इंसानी खोपड़ी से सूप बनाकर पीने और नरमुंड एकत्र करने जैसे दिल दहला देने वाले अपराधों के लिए कुख्यात राजा कोलंदर को आखिरकार कानून ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। लखनऊ की एक अदालत ने कोलंदर और उसके साथी वक्षराज को डबल मर्डर केस में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
कई हत्याओं का आरोप, फार्महाउस से मिले नरकंकाल
राजा कोलंदर, जिनका असली नाम राम निरंजन कोल है, पर 20 से अधिक हत्याओं का आरोप है। साल 2000 में हुए मनोज सिंह और रवि श्रीवास्तव की हत्या के मामले में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया। जब पुलिस ने प्रयागराज स्थित उसके फार्महाउस पर छापा मारा, तो वहां से बड़ी संख्या में मानव खोपड़ियां और हड्डियां बरामद हुईं।
मृत शरीर के अंगों से करता था तांत्रिक अनुष्ठान
जांच में खुलासा हुआ कि कोलंदर तांत्रिक गतिविधियों में लिप्त था और वह अपने पीड़ितों की हत्या कर उनके सिर को अलग कर देता था। फिर मस्तिष्क निकालकर उसका सूप बनाकर पीता था, जिसे वह अपनी तांत्रिक शक्तियों की साधना का हिस्सा मानता था। इसके शरीर के अन्य हिस्सों को वह अलग-अलग स्थानों पर फेंक देता था।
अदालत में चला लंबा मुकदमा, अब उम्रकैद की सजा
एडीजे रोहित सिंह की अदालत ने सोमवार को कोलंदर और उसके साले वक्षराज को आईपीसी की धारा 364, 396, 201, 412 और 404 के तहत दोषी पाया। शुक्रवार को सजा सुनाई गई। सरकारी वकील एम. के. सिंह के अनुसार, अदालत ने उन्हें हत्या, डकैती, सबूत मिटाने और मृतक की संपत्ति का दुरुपयोग जैसे गंभीर अपराधों में दोषी करार दिया।
कौन है राजा कोलंदर?
राजा कोलंदर पहले उत्तर प्रदेश के एक आयुध कारखाने में काम करता था। मानसिक विकृति के बावजूद वह खुद को “राजा” मानता था, जिसे अपनी इच्छा से किसी को भी “दंडित” करने का अधिकार है। वह पत्रकार धीरेंद्र सिंह सहित कई लोगों की हत्या में दोषी पाया गया।
2012 में पत्रकार की हत्या के मामले में उसे पहली बार दोषी करार दिया गया था। उसके फार्महाउस से जो साक्ष्य बरामद हुए, उन्होंने पुलिस को नरभक्षण जैसे आरोपों की भी जांच के लिए मजबूर किया। हालांकि मानसिक परीक्षण में उसे मुकदमे के लायक मानसिक रूप से स्वस्थ घोषित किया गया।
निष्कर्ष: इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला
राजा कोलंदर का मामला भारत की आपराधिक इतिहास की सबसे डरावनी और विचलित करने वाली कहानियों में से एक बन गया है। यह न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और तांत्रिक अंधविश्वास के खतरे को भी उजागर करता है।
अब जब वह उम्रभर जेल में रहेगा, उम्मीद की जा रही है कि इस फैसले से भविष्य के अपराधियों में डर पैदा होगा और पीड़ित परिवारों को न्याय का सुकून मिलेगा।
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