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भीलवाड़ा में गणगौर और दशामाता पूजन की शुरुआत

भीलवाड़ा में गणगौर और दशामाता पूजन की परंपरा शुरू हो गई है। गणगौर पर्व 16 दिन तक उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा, जबकि दशामाता व्रत 24 मार्च को रखा जाएगा।

गणगौर पूजन की परंपरा

गणगौर पूजन के दौरान ईसर (भगवान शिव) और पार्वती की 16 दिन तक पूजा की जाती है। महिलाएं सुहाग की लंबी उम्र और कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना के लिए यह पूजा करती हैं। घर और मंदिरों में कथा-कहानी सुनने की परंपरा भी निभाई जाती है।

16 दिन और 16 शृंगार

  • ईसर-गणगौर को सुंदर वस्त्र पहनाए जाते हैं।
  • चंदन, अक्षत, धूप, दीप, दूब घास और पुष्प से पूजा की जाती है।
  • दीवार पर 16 बिंदियां (रोली, मेहंदी, हल्दी, काजल) लगाई जाती हैं।
  • हरी दूब से 16 बार जल के छींटे देकर पूजा की जाती है।
  • महिला संगठनों द्वारा गणगौर की सवारी भी निकाली जाएगी।
  • गणगौर का मुख्य पर्व 31 मार्च को मनाया जाएगा।

दशामाता पूजन

होली के अगले दिन से दशामाता की कथा शुरू हो जाती है। इस साल दशामाता व्रत 24 मार्च को रखा जाएगा।

  • महिलाएं पीपल वृक्ष की पूजा करेंगी।
  • कुमकुम, मेहंदी, लच्छा, सुपारी और सूत से पूजन किया जाएगा।
  • परिवार की सुख-शांति और आर्थिक समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाएगी।

इस तरह भीलवाड़ा में गणगौर और दशामाता के पूजन का शुभारंभ हो चुका है और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इसे मना रहे हैं। 🎉🙏

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