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भोपाल के बावड़िया कलां इलाके में एक चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। यहां 20 हजार से ज्यादा घरों का गंदा पानी और सीवेज एक नाले में गिर रहा है। इसी गंदे पानी से करीब 600 एकड़ जमीन पर खेती की जा रही है। इनमें से लगभग 400 एकड़ में सब्जियां उगाई जा रही हैं।
करीब 380 किसान परिवार इस जमीन पर खेती करते हैं। हैरानी की बात यह है कि वे खुद भी यही सब्जियां खाते हैं और शहर के हजारों परिवारों तक भी यह सब्जियां पहुंच रही हैं।
13 नालियों का गंदा पानी एक जगह
इस इलाके में आकृति इको सिटी, पल्लवी नगर, रघुनाथ नगर, सलैया, बावड़िया कलां, रोहित नगर और गुलमोहर कॉलोनी सहित कई इलाकों का गंदा पानी इस नाले में आता है। लगभग 13 छोटी-बड़ी नालियां इसमें मिलती हैं।
नाले में अब प्राकृतिक पानी नहीं आता, बल्कि यह पूरी तरह सीवेज के सहारे बह रहा है। खेतों की सिंचाई के लिए करीब 240 बिजली और डीजल पंप दिन-रात इसी पानी को खींच रहे हैं।
अलग-अलग जगहों पर हालात
रेलवे पटरी के पास:
नाले के बीच रखे पंप से करीब सात एकड़ में धनिया, टमाटर और चना जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। बारिश के समय छोड़कर बाकी पूरे साल सीवेज का पानी ही खेती का सहारा है।
एसटीपी के पास:
सरकारी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के पास भी हालात बेहतर नहीं हैं। पाइप के जरिए नाले का पानी खेतों तक पहुंचाया जा रहा है और डीजल पंप से सिंचाई हो रही है।
बीडीए निर्माण क्षेत्र के पास:
यहां नालियों का गंदा पानी मिट्टी की मेढ़ बनाकर गड्ढों में रोका जाता है और उसी से सब्जियां उगाई जा रही हैं। ये सब्जियां अगले दिन मंडियों के जरिए घरों तक पहुंच जाती हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉक्टरों के अनुसार सीवेज के पानी में हैवी मेटल और ई-कोली, साल्मोनेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया हो सकते हैं। ऐसी सब्जियां खाने से टाइफाइड, डायरिया और लंबे समय में किडनी और लिवर की बीमारी हो सकती है। यह एक तरह का धीमा जहर है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह शहरी योजना की बड़ी विफलता है। बिना सही ट्रीटमेंट के सीवेज का पानी खेती में इस्तेमाल करना कानूनन गलत है और इससे पर्यावरण और लोगों की सेहत दोनों को खतरा है।
कुल मिलाकर, भोपाल में सीवेज से उगाई जा रही सब्जियां हजारों परिवारों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
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