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महावीर जयंती 2025: जानिए श्री महावीरजी तीर्थ क्षेत्र का चमत्कारी इतिहास

श्री महावीरजी, करौली (राजस्थान)
भारत का जैन समाज का दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ स्थल श्री महावीरजी, जिसे “अहिंसा नगरी” भी कहा जाता है, राजस्थान में स्थित है। यह स्थान देश-विदेश से लाखों भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां भगवान महावीर के दर्शन के लिए सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। चांदनपुर वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध यह तीर्थ क्षेत्र शांति और भक्ति का एक प्रमुख केंद्र है।

कैसे हुई प्रतिमा की प्रकटि
करीब 1020 साल पहले गंभीर नदी के किनारे एक ग्वाले की गाय ने चमत्कार दिखाया। गाय एक मिट्टी के टीले पर जाकर खुद-ब-खुद दूध छोड़ने लगी। ग्वाले ने इस जगह की खुदाई की तो वहां से अष्टधातु (आठ धातुओं से बनी) की भगवान महावीर की प्रतिमा प्रकट हुई।

कहा जाता है कि उस समय जयपुर के महाराजा ने इस चमत्कारी प्रतिमा को जयपुर ले जाने की कोशिश की, लेकिन भगवान महावीर की इच्छा के विरुद्ध यह संभव नहीं हुआ। मान्यता है कि “भगवान महावीर ने चरण छतरी से मंदिर स्थल तक 900 गाड़ियों को तोड़ दिया” और इस चमत्कारी स्थान पर ही प्रतिमा को स्थापित किया गया। करीब 500 साल पहले यहां एक विशाल मंदिर का निर्माण हुआ, जिसमें आज भी भगवान महावीर विराजमान हैं।

श्रद्धा और भक्ति का केंद्र
हर साल करीब 10.5 लाख श्रद्धालु श्री महावीरजी तीर्थ क्षेत्र में आकर भगवान महावीर के दर्शन करते हैं। तीर्थ क्षेत्र का प्रबंधन श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र प्रबंधकारिणी कमेटी द्वारा किया जाता है, जिसका मुख्यालय जयपुर में भट्टारक जी की नसिया पर स्थित है। इस समय कमेटी के अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल हैं।

यात्रियों के लिए सुविधाएं
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां 2 दर्जन से ज्यादा धर्मशालाएं बनी हुई हैं। इन धर्मशालाओं में आधुनिक सुविधाओं से लैस 3000 विस्तर और 1500 से ज्यादा कमरे उपलब्ध हैं, जहां यात्री आराम से ठहर सकते हैं।

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