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मोहम्मद शमी और रोज़े पर उठा विवाद – जानिए पूरी कहानी

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी कई बार अपने खेल के साथ-साथ निजी ज़िंदगी को लेकर भी सुर्खियों में आ चुके हैं। मैदान पर उनकी गेंदबाज़ी जितनी चर्चा में रहती है, उतना ही कई बार उनकी निजी आदतों को लेकर भी विवाद खड़ा हो जाता है। ऐसा ही एक मामला तब सामने आया था, जब रमज़ान के महीने में शमी मैच के दौरान एनर्जी ड्रिंक पीते हुए कैमरे में दिखाई दिए।

ये घटना आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए सेमीफाइनल मैच की है। उस वक्त भारत के लिए शमी मुख्य तेज़ गेंदबाज़ की भूमिका निभा रहे थे। मैच के दौरान कैमरे में उनके एनर्जी ड्रिंक पीते हुए दिखाई देने के बाद कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि शमी रमज़ान में रोज़ा नहीं रख रहे हैं। यही विवाद धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया।

इस विवाद पर मोहम्मद शमी ने चुप्पी तोड़ते हुए साफ कहा कि खेल और धर्म को एक-दूसरे से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने न्यूज 24 को दिए इंटरव्यू में बताया –

“हम 42 से 45 डिग्री की गर्मी में देश के लिए खेल रहे होते हैं। उस वक्त शरीर पर बहुत दबाव रहता है। हमारे धर्म में भी यह प्रावधान है कि अगर कोई इंसान सफर कर रहा है या किसी ज़िम्मेदारी को निभा रहा है, तो उसे रोज़े से छूट मिल सकती है। बाद में उसकी भरपाई की जा सकती है, जो मैंने की भी है।”

शमी का कहना था कि मैदान पर उतरते समय खिलाड़ी खुद को देश के लिए बलिदान करता है। ऐसे में शरीर को हाइड्रेट रखना और एनर्जी बनाए रखना ज़रूरी होता है। यही वजह थी कि उन्होंने मैच के दौरान एनर्जी ड्रिंक लिया।

एनर्जी ड्रिंक वाली घटना के बाद शमी को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोलिंग झेलनी पड़ी। बहुत से लोग लगातार उन पर तंज कस रहे थे। इस पर शमी ने कहा कि वे सोशल मीडिया की नकारात्मक टिप्पणियों पर ध्यान ही नहीं देते।

“मैं खुद सोशल मीडिया पर कमेंट्स पढ़ता ही नहीं। मेरा अकाउंट मेरी टीम मैनेज करती है। अक्सर वही लोग ऐसी बातें करते हैं, जिन्हें खुद सुर्खियों में आना होता है।”

इस तरह शमी ने साफ कर दिया कि उनकी नज़र में देश के लिए खेलना सबसे बड़ी प्राथमिकता है और धार्मिक नियमों की भी वे इज़्ज़त करते हैं, लेकिन खेल के दौरान जो छूट मिलती है उसका पालन करना भी सही है।

यह विवाद भले ही सोशल मीडिया पर कुछ समय तक चला, लेकिन शमी ने अपने जवाब से स्थिति साफ कर दी। उन्होंने यह भी संदेश दिया कि खिलाड़ियों के लिए फिट रहना और देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करना ही सबसे अहम है। धर्म और खेल दोनों अलग-अलग चीज़ें हैं और दोनों का सम्मान करते हुए सही संतुलन बनाना ही असली समझदारी है।

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