भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच तालिबान के वरिष्ठ नेता और अफगानिस्तान के पूर्व पाकिस्तानी राजदूत मुल्ला अब्दुल सलाम ज़ईफ ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने इस पूरे संघर्ष पर एक अलग ही रोशनी डाल दी है। ज़ईफ ने साफ कहा है कि पाकिस्तान इस झगड़े को जिहाद का रंग देकर पश्तूनों को भड़काने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह जंग किसी भी तरह धार्मिक नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक है।
ज़ईफ ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि पाकिस्तान को पश्तून युवाओं को ‘झूठे जिहाद’ के नाम पर मरने के लिए उकसाने का कोई हक नहीं है। उन्होंने पश्तून परिवारों से अपील की कि वे अपने बच्चों को इस सियासी साजिश का हिस्सा न बनने दें।
तालिबान ने बदली दिशा, अब नहीं बनेगा पाकिस्तान का मोहरा
एक समय था जब तालिबान और पाकिस्तान के बीच गहरे रिश्ते माने जाते थे। तालिबान, जो मुख्यतः पश्तूनों का संगठन है, लंबे समय तक पाकिस्तान के प्रभाव में रहा। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। ज़ईफ का बयान इस बात का संकेत है कि तालिबान अब पाकिस्तान की रणनीतिक चालों में ‘सपोर्टिंग प्लेयर’ नहीं बनना चाहता।
भारत की कार्रवाई के बाद बदले हालात
भारत ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के आतंकी अड्डों पर सटीक हमले किए, जिसमें 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने और दो दर्जन से अधिक के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों पर ड्रोन और तोपों से हमला करने की कोशिश की, मगर हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी।
इसी पृष्ठभूमि में ज़ईफ का बयान सामने आना बेहद अहम माना जा रहा है। इससे साफ हो गया है कि अफगान नेतृत्व अब खुद को पाकिस्तान के ‘प्रॉक्सी वॉर’ से दूर रखना चाहता है।
तनाव का असर व्यापार पर भी
भारत-पाकिस्तान टकराव का सीधा असर अफगानिस्तान के व्यापार पर भी पड़ने लगा है। वाघा बॉर्डर पर भारत के लिए भेजे गए दर्जनों ट्रक फंसे हुए हैं, जिनमें सूखे मेवे जैसे उत्पाद भरे हुए हैं। अफगानिस्तान-पाकिस्तान जॉइंट चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख नकीबुल्लाह सफी ने चिंता जताई कि यदि यही हालात जारी रहे, तो अफगान निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
निष्कर्ष:
तालिबान का यह बदला हुआ रुख क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा संकेत है। अब वह पाकिस्तान की पुरानी नीतियों का हिस्सा बनने के बजाय खुद को एक जिम्मेदार और संतुलित शासन के रूप में स्थापित करना चाहता है। ज़ईफ का यह बयान पाकिस्तान के लिए एक करारा संदेश है—अब हर लड़ाई को “जिहाद” कहकर मासूमों की बलि नहीं चढ़ाई जा सकती।
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