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राजस्थान और मध्यप्रदेश के लिए बड़ी खुशखबरी: बनेगा चीता कॉरिडोर, इन जिलों को मिलेगा फायदा

क्या है चीता कॉरिडोर?
चीता कॉरिडोर एक ऐसा रास्ता होगा, जिससे वन्यजीव एक जगह से दूसरी जगह आसानी से जा सकेंगे। इससे उनकी सुरक्षा और संरक्षण में मदद मिलेगी।

कहाँ बनेगा चीता कॉरिडोर?
मध्यप्रदेश के कुनो नेशनल पार्क और राजस्थान के जंगलों के बीच 17 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में यह कॉरिडोर बनेगा।

  • राजस्थान का हिस्सा: 6500 वर्ग किलोमीटर

  • मध्यप्रदेश का हिस्सा: 10500 वर्ग किलोमीटर

चीते कुनो नेशनल पार्क से राजस्थान के मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व होते हुए गांधी सागर सेंचुरी तक आ-जा सकेंगे।

कौन-कौन से जिले होंगे शामिल?

  • कोटा

  • बूंदी

  • बारां

  • झालावाड़

  • सवाई माधोपुर

  • करौली

  • चित्तौड़गढ़

इन जिलों के जंगलों और संरक्षित इलाकों को कॉरिडोर में जोड़ा जाएगा।

कैसे हुई तैयारी?
कॉरिडोर बनाने से पहले विशेषज्ञों की टीम ने राजस्थान के जंगलों का सर्वे किया। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों ने मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व, शेरगढ़, भैंसरोडगढ़ और गांधी सागर के जंगलों का निरीक्षण किया।

कुनो पार्क में अभी कितने चीते हैं?

  • कुल 26 चीते (5 नर, 7 मादा और 14 शावक)

  • 12 चीते दक्षिण अफ्रीका से

  • 8 चीते नामीबिया से लाए गए हैं।

कॉरिडोर बनने से क्या फायदा होगा?

  • चीतों को लंबी दूरी तक दौड़ने के लिए खुला जंगल मिलेगा।

  • पहले जो चीते राजस्थान में भटक कर आ जाते थे, उन्हें पकड़कर वापस भेजना पड़ता था। अब वे खुद आराम से मूव कर सकेंगे।

  • पर्यटक टाइगर रिजर्व में बाघों के साथ चीतों को भी देख सकेंगे।

  • जंगल में वन्यजीवों की संख्या बढ़ेगी, जिससे जंगल और ज्यादा समृद्ध होगा।

जल्द होगा एमओयू
राजस्थान सरकार ने कॉरिडोर बनाने की योजना मुख्यमंत्री को भेज दी है। मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच समझौता (एमओयू) होगा। दोनों राज्यों के अधिकारी कॉरिडोर का पूरा नक्शा भी बना चुके हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
मुख्य वन संरक्षक सुगनाराम जाट ने कहा कि चीता कॉरिडोर बनाना एक उच्चस्तरीय फैसला है और स्थानीय स्तर पर कुछ कहना संभव नहीं है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे अफ्रीका में शेर, चीते और तेंदुए एक साथ रहते हैं, वैसे ही यहां भी बाघ और चीते एक साथ रह सकते हैं। जरूरत बस इतनी है कि जंगल में खाने के लिए पर्याप्त शिकार मौजूद हो।

निष्कर्ष
चीता कॉरिडोर से ना केवल चीतों को आजादी से घूमने का मौका मिलेगा, बल्कि राजस्थान और मध्यप्रदेश के जंगलों में वन्यजीवों की दुनिया और भी खूबसूरत बन जाएगी।

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