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बांसवाड़ा, राजस्थान:
राजस्थान की पहली सोने की खदान का सपना फिलहाल रुक गया है। बांसवाड़ा जिले की भूकिया-जगपुरा में बनने वाली इस खदान की नीलामी रद्द कर दी गई है। खान विभाग ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि नीलामी में जीतने वाली कंपनी के दस्तावेजों में कई गड़बड़ियां पाई गईं।
कौन-सी थी ये खामियां?
रतलाम की ओवैस मेटल एंड मिनरल प्रोसेसिंग लिमिटेड को खदान के लिए चुना गया था, लेकिन जांच में पता चला कि:
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कंपनी की नेटवर्थ और आयकर रिटर्न में अंतर है।
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200 करोड़ रुपये की जरूरी शर्त पूरी नहीं की गई थी।
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शेयरहोल्डिंग के आंकड़े भी गलत निकले।
इन खामियों की वजह से खान विभाग ने मई 2024 में हुई इस नीलामी को रद्द कर दिया।
दोबारा होगी नीलामी
संयुक्त सचिव आशु चौधरी ने बताया कि अब नई नीलामी की तैयारी की जा रही है। उम्मीद है कि नवंबर-दिसंबर 2025 तक दोबारा नीलामी पूरी कर ली जाएगी।
क्या था इस खदान का महत्व?
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यहां से करीब 113.52 मिलियन टन सोने का अयस्क निकलने का अनुमान है।
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इससे अगले 50 सालों में 1 लाख करोड़ रुपये तक की कमाई हो सकती है।
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इसके साथ ही तांबा, निकल और कोबाल्ट जैसी धातुएं भी यहां मिलेंगी।
रोजगार और विकास की उम्मीद
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इस प्रोजेक्ट से करीब 50,000 लोगों को सीधा और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
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इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा।
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इससे राजस्थान की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
पहले ही शुरू हो गई थी तैयारियां
खदान में मशीनरी लगाने और पर्यावरण मंजूरी जैसी प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी। माना जा रहा था कि 2026-27 तक यहां से सोने का उत्पादन शुरू हो जाएगा, लेकिन अब यह काम और देर से शुरू होगा।
निष्कर्ष:
राजस्थान को देश का चौथा ऐसा राज्य बनने का गौरव मिला था, जहां सोने की खदान को लाइसेंस मिला। लेकिन कंपनी की लापरवाही और दस्तावेजों की गड़बड़ी के चलते यह बड़ी योजना फिलहाल अटक गई है। अब उम्मीद है कि अगली नीलामी में योग्य कंपनी का चयन होगा और यह खदान प्रदेश की तरक्की में मददगार साबित होगी।
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