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चिड़ावा (झुंझुनूं)। राजस्थान में गिरते भूजल स्तर और पानी की कमी को देखते हुए, सीकर के किसान सुंडाराम वर्मा ने ड्राई फार्मिंग तकनीक अपनाई है। इस तकनीक की खासियत यह है कि पौधे सिर्फ 1 लीटर पानी में विकसित हो सकते हैं और बाद में बारिश की नमी से ही बढ़ते हैं।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
इस विधि में:
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पौधों को सिर्फ शुरुआत में 1 लीटर पानी दिया जाता है।
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उसके बाद मिट्टी में नमी बनाए रखी जाती है, जिससे पौधों को अतिरिक्त पानी की जरूरत नहीं पड़ती।
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इस तकनीक में बरसात के पानी को संचित किया जाता है और नमी को लंबे समय तक बनाए रखा जाता है।
डेढ़ लाख से ज्यादा पौधे लगाए
किसान सुंडाराम वर्मा अब तक सीकर, चूरू और झुंझुनूं समेत कई जिलों में 1.5 लाख से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं। इनमें से अधिकतर पौधे आज भी हरे-भरे हैं।
देवरोड गांव में 7500 पौधे लगाए गए
देवरोड पंचायत (चिड़ावा) में मुक्तिधाम की 8 हेक्टेयर भूमि पर 7500 पौधे लगाए गए हैं। यह भूमि पहले झाड़ियों से भरी थी, लेकिन सितंबर 2023 में ग्रामीणों ने इसे समतल कर पौधारोपण किया।
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एचडीएफसी बैंक के सहयोग से शीशम, नीम, पीपल, बड़ और लेसूवा के पौधे लगाए गए।
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खास बात यह है कि इन पौधों को एक बार भी पानी नहीं दिया गया, फिर भी वे 8-10 फीट ऊंचे हो चुके हैं।
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इनकी देखभाल मनरेगा के श्रमिकों द्वारा की जा रही है।
शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयोगी तकनीक
यह विधि राजस्थान और गुजरात जैसे शुष्क इलाकों के लिए बेहद लाभदायक है।
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इसमें बरसात के पानी को जमीन में संरक्षित किया जाता है।
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मिट्टी की गहरी जुताई करके नमी बनाए रखी जाती है।
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कम पानी में तेजी से बढ़ने वाली फसलें और पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
कम पानी में खेती का नया तरीका
सुंडाराम वर्मा ने नई दिल्ली के पूसा कृषि संस्थान में यह तकनीक सीखी और इसे राजस्थान में अपनाकर भूजल संरक्षण और पर्यावरण बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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