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कपासन के बनाकिया कलां गांव में एक अनोखी और पारंपरिक रस्म देखने को मिली, जब भाई सजी हुई बैलगाड़ियों में मायरा लेकर अपनी बहनों के घर पहुंचे। इस खास मौके को देखने के लिए गांव और आसपास के इलाके से बड़ी संख्या में लोग जुटे।
ढोल-शहनाई और नृत्य का माहौल
बहनों के विवाह के अवसर पर किशनलाल, उदयराम, रतनलाल, लालूराम, लक्ष्मण, लादूलाल, कालूराम, सुरेश अहीर और शंकरलाल नानूराम अहीर बैलगाड़ियों में मायरा लेकर पहुंचे। साथ में बैंडबाजों की धुन, ढोल और शहनाई का संगीत चल रहा था। महिलाएं लोकगीत गाते हुए नृत्य कर रही थीं, जिससे माहौल पूरी तरह पारंपरिक और उत्सवमय हो गया।
मंदिर में पूजा और पुष्पवर्षा
मायरा की रस्म के दौरान भेरुजी बावजी मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। साथ ही ड्रोन कैमरे से फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की गई। फूलों की पुष्पवर्षा और सजी बैलगाड़ियों का दृश्य इतना आकर्षक था कि लोग मोबाइल से सेल्फी लेने में जुट गए।
लोग हुए इस दृश्य के दीवाने
इस पारंपरिक और रंगारंग दृश्य को देखने के लिए न सिर्फ गांववाले, बल्कि आसपास के ग्रामीण और राहगीर भी बड़ी संख्या में इकट्ठे हुए। यह पुरानी परंपरा और नए अंदाज का मिलाजुला उत्सव बन गया, जो सभी के लिए यादगार बन गया।
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