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राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव समय पर नहीं हो पा रहे हैं। जैसलमेर में आयोजित जन जागरूकता बैठक में पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव ने सरकार पर चुनाव जानबूझकर टालने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि चुनाव न होने से जनता का प्रतिनिधित्व नहीं हो पा रहा और लोग नाराज हैं।
सरकार पर आरोप
धनदेव ने कहा कि सरकार चुनाव किसी न किसी बहाने आगे खींच रही है, जो आमजन के हित में नहीं है। इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस को हर चुनाव में जीताने के लिए मेहनत करनी होगी।
हाईकोर्ट और निर्वाचन आयोग का दबाव
राजस्थान हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल तक चुनाव न कराने पर राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है। आयोग का कहना है कि देरी उनकी ओर से नहीं, बल्कि सरकार से समय पर जानकारी न मिलने के कारण हुई।
पंचायती राज चुनाव में अड़चन
- 31 दिसंबर 2025: परिसीमन पूरा हुआ।
- 25 फरवरी 2026: मतदाता सूची प्रकाशित की गई।
- 9 मार्च 2026: आयोग ने सरकार से आरक्षण तय करने के लिए कहा।
- 31 मार्च 2026: सरकार ने कहा प्रक्रिया जारी है और OBC आयोग का कार्यकाल सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया।
इस कारण अब चुनाव संभवतः अक्टूबर-नवंबर 2026 में होंगे।
नगरीय निकाय चुनाव में देरी
नगरीय निकायों के लिए परिसीमन रद्द होने और सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब न मिलने के कारण भी चुनाव स्थगित हैं। आयोग ने फरवरी 2026 में खुद मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया। 196 निकायों की अंतिम सूची 22 अप्रैल और शेष 113 निकायों की सूची 8 मई 2026 को जारी होगी।
वर्तमान स्थिति
राज्य सरकार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और परिसीमन के बहाने चुनाव टालने की कोशिश कर रही है, जबकि निर्वाचन आयोग अदालत में कार्रवाई कर सकता है। अगले कुछ सप्ताह राजस्थान की स्थानीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।
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