जयपुर:
राजस्थान में जलवायु परिवर्तन की वजह से लोगों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है। गर्मी बढ़ रही है, बारिश अनियमित हो गई है और मौसम बार-बार बदल रहा है। इसकी वजह से हीट स्ट्रोक, त्वचा रोग, अस्थमा और एलर्जी जैसी बीमारियां बढ़ गई हैं। बिजली, पानी और परिवहन जैसी जरूरी सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए अब राज्य में ‘क्लाइमेट चेंज एडेप्टेशन प्लान’ बनाया जा रहा है। यह प्लान मार्च 2026 तक तैयार होगा। इसे राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट मिलकर बना रहे हैं। दोनों के बीच एमओयू (समझौता) हो चुका है।
क्या होगा इस योजना में?
यह योजना 2026 से 2030 तक के लिए होगी। इसमें विभिन्न विभागों जैसे –
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स्वास्थ्य और चिकित्सा
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कृषि
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जल संसाधन
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वन विभाग
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नगर निकाय
के लिए जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।
इसके अलावा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और पानी का बेहतर उपयोग, पशुपालन और नागरिक सुविधाओं पर भी काम किया जाएगा। इसका मकसद है कि लोग जलवायु संकट के बावजूद आराम से जीवन जी सकें।
क्यों है यह जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार –
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बारिश का तरीका बदल गया है जिससे फसलें खराब हो रही हैं।
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जमीन की उपजाऊ शक्ति घट रही है, जिससे किसान खेती छोड़ रहे हैं।
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प्लास्टिक के ज्यादा इस्तेमाल से हवा, पानी और मिट्टी प्रदूषित हो रही है।
हम क्या कर सकते हैं?
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ग्रीन बिल्डिंग अपनाएं और छत या बालकनी में पौधे लगाएं।
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हर साल ज्यादा पेड़ लगाएं।
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निजी गाड़ियों की जगह साइकिल या सार्वजनिक वाहन का उपयोग करें।
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बिजली और पानी की बचत करें।
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सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करें।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. विजय सिंघल (पूर्व मुख्य अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण मंडल) ने कहा कि
जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान बढ़ रहा है। गर्मी के दिन ज्यादा और सर्दी के दिन कम हो गए हैं। इससे बिजली की खपत बढ़ गई है और प्रदूषण भी। शहरीकरण और निर्माण कार्यों से भी वातावरण गरम हो रहा है। इसलिए जलवायु के अनुसार बदलाव जरूरी हैं।
डॉ. वीरेन्द्र सिंह (श्वास रोग विशेषज्ञ) का कहना है कि
जलवायु परिवर्तन से अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों पर ज्यादा असर पड़ रहा है। नई योजना बनाते समय बीमार और स्वस्थ दोनों तरह के लोगों की जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए। यह प्लान रिसर्च और अध्ययन के आधार पर ही बनाया जाना चाहिए, सिर्फ अंदाजों पर नहीं।
निष्कर्ष:
जलवायु परिवर्तन का असर अब नजर आने लगा है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो हालात और खराब हो सकते हैं। हमें सरकार के साथ-साथ खुद भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
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