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राजस्थान में सौंफ की खेती किसानों के लिए मुनाफे का अच्छा जरिया बन रही है। सौंफ एक खुशबूदार और औषधीय पौधा है, जिसका इस्तेमाल मसाले के रूप में किया जाता है। यह स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ पाचन के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है। अब राज्य में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है।
उन्नत किस्में
अच्छी पैदावार के लिए इन किस्मों की सिफारिश की जाती है:
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राजस्थान फेनल-1
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राजस्थान फेनल-2
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गुजरात फेनल-1
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गुजरात फेनल-2
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आरएफ-143
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पूसा उज्जा
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पूसा बरुणी
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आईएफ-125
ये किस्में ज्यादा उत्पादन और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती हैं।
मिट्टी और जलवायु
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सौंफ की खेती के लिए ठंडी और शुष्क जलवायु अच्छी रहती है।
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15 से 25 डिग्री तापमान उपयुक्त है।
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दोमट या बलुई दोमट मिट्टी, जिसमें पानी की निकासी अच्छी हो, सबसे बेहतर है।
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मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए।
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एक हेक्टेयर में 4-6 किलो बीज पर्याप्त है।
ज्यादा पैदावार के लिए क्या करें?
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खेत की गहरी जुताई करें और 2-3 बार हैरो चलाएं।
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20-25 टन गोबर की खाद डालें।
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बुवाई से पहले बीज को कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम प्रति किलो बीज) से उपचारित करें।
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कतार से कतार की दूरी 45-60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर रखें।
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12-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें और पानी भराव से बचाएं।
खाद और कीट नियंत्रण
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प्रति हेक्टेयर 90 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फास्फोरस और 20 किलो पोटाश देना लाभकारी है।
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रोग से बचाव के लिए कार्बेन्डाजिम या मैकोजेब का छिड़काव करें।
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कीट नियंत्रण के लिए जैविक या नीम आधारित कीटनाशक बेहतर रहते हैं।
फसल कब तैयार होती है?
सौंफ की फसल लगभग 5-6 महीने में तैयार हो जाती है। जब फूलों के गुच्छे पीले होकर सूखने लगें, तब कटाई करें। फसल को छायादार जगह पर सुखाएं।
एक हेक्टेयर से 18-22 क्विंटल तक उपज मिल सकती है।
सही तरीके और उन्नत तकनीक अपनाकर किसान सौंफ की खेती से अच्छा लाभ कमा सकते हैं।
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