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श्रीगंगानगर। राजस्थान में जिन सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बहुत कम थी, उन्हें अब बंद कर दिया गया है। राज्य सरकार ने 261 स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। इन स्कूलों में बच्चों से ज्यादा ध्यान शिक्षकों की नियुक्तियों और तबादलों पर दिया जा रहा था।
अब स्कूलों को मिलाया जाएगा
बंद किए गए स्कूलों को पास के बड़े स्कूलों में मिलाया जाएगा और वहां एकीकृत उच्च माध्यमिक विद्यालय (SHM) बनाए जाएंगे। इससे बच्चों को बेहतर पढ़ाई का माहौल और ज्यादा सुविधाएं मिल सकेंगी। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले के भी 8 स्कूल इस सूची में शामिल हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
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कई स्कूलों में सिर्फ 2 से 5 बच्चों के लिए पूरा स्कूल स्टाफ और भवन मौजूद था।
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ये स्कूल केवल शिक्षकों की पोस्टिंग और तबादले के लिए इस्तेमाल हो रहे थे।
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इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा था।
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अब इन स्कूलों को मिलाकर बेहतर संसाधन वाले स्कूलों में पढ़ाई करवाई जाएगी।
पत्रिका की खबर से आई जागरूकता
राजस्थान पत्रिका ने लगातार इन स्कूलों की समस्याओं को उजागर किया था।
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“बच्चों की पढ़ाई नहीं, शिक्षकों के लिए जुगाड़ बने सरकारी स्कूल”
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“मंत्री जी…प्राइमरी स्कूलों का प्रबंधन भी प्राइमरी लेवल पर”
इन रिपोर्ट्स के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और माध्यमिक शिक्षा निदेशक आशीष मोदी ने स्कूलों के एकीकरण के आदेश जारी किए।
किस तरह के स्कूल किए गए बंद?
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9 हिंदी माध्यम स्कूल उच्च विद्यालयों में मिलाए गए।
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11 स्कूल ज्यादा नामांकन वाले स्कूलों में समाहित किए गए।
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प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने भी 35 स्कूलों का एकीकरण किया है।
निष्कर्ष:
सरकार का यह फैसला बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब कम संख्या वाले स्कूलों के बजाय सभी बच्चों को एक ही अच्छे स्कूल में पढ़ने का मौका मिलेगा, जहां संसाधन और सुविधाएं भी बेहतर होंगी।
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