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राजस्थान विश्वविद्यालय में अब सभी नियमित और स्वयंपाठी छात्रों को परीक्षा फॉर्म भरने से पहले दस्तावेज वेरिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। इसके कारण छात्रों को कई घंटों तक विश्वविद्यालय में कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है। दस्तावेज़ वेरिफिकेशन के बाद ही छात्र परीक्षा फॉर्म भर पा रहे हैं।
इसकी वजह है, शिक्षा मंत्रालय द्वारा छात्रों के लिए एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) आइडी बनवाना। अब विश्वविद्यालय में प्रवेश करते समय छात्रों से यह आइडी मांगी जा रही है। छात्र अपने आधार कार्ड से एबीसी आइडी बना रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय के पास पहले से जो रिकॉर्ड था, वह एबीसी आइडी से मेल नहीं खा रहा। इसका कारण यह है कि छात्रों ने पहले विश्वविद्यालय में गलत जानकारी दी थी। इसलिए अब विश्वविद्यालय दस्तावेजों को एबीसी आइडी से वेरिफाई कर रही है और डेटा मिसमैच होने पर इसे सही करवाया जा रहा है।
एबीसी आइडी क्या है?
एबीसी आइडी के जरिए छात्र के सभी शैक्षणिक दस्तावेजों का रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के पास रहेगा। यह आइडी डीजी लॉकर से लिंक की जाएगी, जिससे छात्रों के सभी दस्तावेज़ वहां भेजे जाएंगे। यदि डेटा मिसमैच होता है, तो दस्तावेज़ डीजी लॉकर में नहीं भेजे जाएंगे।
फर्जी डिग्रियों पर रोक:
यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को एबीसी आइडी बनाने का निर्देश दिया है, ताकि भर्ती परीक्षाओं में फर्जी डिग्रियों के मामलों को रोका जा सके। इसके बाद विश्वविद्यालयों को छात्र की डिग्री समय पर अपडेट करनी होगी, जिससे फर्जी दस्तावेज़ पर नियंत्रण मिलेगा और भर्ती एजेंसियां आसानी से डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन कर सकेंगी।
कुल मिलाकर, अब परीक्षा फॉर्म भरने से पहले छात्रों को दस्तावेज़ वेरिफिकेशन से गुजरना पड़ रहा है, ताकि भविष्य में डेटा मिसमैच और फर्जी दस्तावेज़ की समस्या से बचा जा सके।
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