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राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए नए नियम, अब युवा प्रशासकों को मिलेगा ज्यादा मौका

खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) में बदलाव करने का बड़ा फैसला लिया है। अब महासंघों के शीर्ष पदों – अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष – के लिए चुनाव लड़ने के नियम पहले से आसान बना दिए जाएंगे।

अभी तक किसी भी उम्मीदवार को इन बड़े पदों पर चुनाव लड़ने के लिए कार्यकारी समिति में कम से कम दो कार्यकाल का अनुभव होना जरूरी था। यानी बिना लंबे समय तक कमेटी में काम किए हुए कोई भी व्यक्ति अध्यक्ष या सचिव जैसे बड़े पद पर दावेदारी पेश नहीं कर सकता था।

नए बदलाव के बाद यह शर्त एक कार्यकाल तक सीमित कर दी जाएगी। यानी अब अगर किसी व्यक्ति ने कार्यकारी समिति में एक कार्यकाल पूरा कर लिया है, तो वह अध्यक्ष, सचिव या कोषाध्यक्ष जैसे पदों के लिए चुनाव लड़ सकता है।

खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि योग्य और नए लोग भी चुनाव में आ सकें। पहले दो कार्यकाल की शर्त की वजह से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों का दायरा बहुत सीमित हो जाता था। अब इस संशोधन के बाद ज्यादा से ज्यादा युवा प्रशासक और पूर्व खिलाड़ी भी बड़े पदों पर आने का मौका पा सकेंगे।

मंत्री ने यह भी कहा कि इस नियम से संतुलन बना रहेगा –

उम्मीदवारों के पास अनुभव भी होगा, और चुनाव में ज्यादा विकल्प भी उपलब्ध रहेंगे।

उषा और चौबे को मिलेगा फायदा

इस संशोधन का सीधा फायदा भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा और भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के अध्यक्ष कल्याण चौबे को मिलेगा। दोनों ने अपने-अपने निकायों की कार्यकारी समिति में एक-एक कार्यकाल पूरा कर लिया है। नए नियम लागू होने के बाद, वे दोबारा चुनाव लड़ सकेंगे।

यह नियम सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राज्य संघों पर भी लागू होगा। यानी राज्यों के अध्यक्ष, सचिव या कोषाध्यक्ष भी अब राष्ट्रीय महासंघों में चुनाव लड़ सकते हैं। इससे चुनाव के समय प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और नए चेहरे सामने आएंगे।

यह पूरा बदलाव राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक का हिस्सा है। यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है और अब राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। जैसे ही राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलती है, यह औपचारिक रूप से कानून बन जाएगा।

आसान शब्दों में कहा जाए तो, अब खेल महासंघों में नेतृत्व करने का मौका सिर्फ पुराने और लंबे समय तक काम करने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। नए लोग, युवा प्रशासक और खिलाड़ी भी तेजी से ऊपर आकर बड़े पदों की जिम्मेदारी ले सकेंगे।

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