भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़ को उनके जमाने में लोग द वॉल कहते थे। उनकी बैटिंग इतनी क्लासिक और मजबूत थी कि गेंदबाजों के लिए उन्हें आउट करना बेहद मुश्किल होता था। द्रविड़ ने अपने 17 साल लंबे इंटरनेशनल करियर में भारत के लिए 24000 से ज्यादा रन बनाए। टेस्ट और वनडे दोनों में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने सिर्फ 1 टी20 इंटरनेशनल खेला था, जिसमें उन्होंने 31 रन बनाए थे।
इतनी उपलब्धियों के बावजूद राहुल द्रविड़ ने हाल ही में एक बड़ा खुलासा किया है। भारत के ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन से बातचीत के दौरान द्रविड़ ने बताया कि उनके करियर में ऐसे दो मैच हैं जिनका नतीजा वह बदलना चाहेंगे। इनमें एक टेस्ट मैच और एक वनडे मैच शामिल है।
राहुल द्रविड़ ने बताया कि साल 1997 में उन्होंने वेस्टइंडीज दौरे पर एक टेस्ट मैच खेला था, जो उनके लिए आज भी अफसोस का कारण है। यह मैच बारबाडोस में हुआ था। भारत को जीत के लिए सिर्फ 120 रन का टारगेट मिला था, लेकिन टीम इंडिया 80 रन पर ऑल आउट हो गई।
द्रविड़ ने कहा –
“ये मेरे पहले दौरे का टेस्ट था। पिच बहुत कठिन थी और वेस्टइंडीज की आखिरी जोड़ियों ने 50-60 रन जोड़ दिए थे। हमें आसान टारगेट मिला था, लेकिन हम संभल नहीं पाए। अगर हम वह मैच जीत जाते तो 5 मैचों की सीरीज 1-0 से हमारे नाम हो जाती।”
दूसरा मैच जिसे द्रविड़ दोबारा खेलना चाहते हैं, वह है 2003 का वर्ल्ड कप फाइनल। यह मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच साउथ अफ्रीका में हुआ था।
द्रविड़ ने याद किया –
“हमने टॉस जीता और सही फैसला किया क्योंकि आसमान में बादल थे। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही बेहतरीन खेल दिखाया। उन्होंने इतने रन बना दिए कि मैच हमारे हाथ से निकल गया। काश हम उस दिन का नतीजा बदल पाते।”
उस फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने रिकी पोंटिंग की कप्तानी और तूफानी बल्लेबाजी के दम पर भारत को मात दी थी। भारतीय फैन्स आज भी मानते हैं कि अगर वह मैच इंडिया जीत जाता तो क्रिकेट का इतिहास बदल जाता।
राहुल द्रविड़ का करियर कई बड़ी जीतों और शानदार पारियों से भरा पड़ा है। लेकिन खिलाड़ियों के दिल में हमेशा कुछ अधूरी ख्वाहिशें रह जाती हैं। 1997 का बारबाडोस टेस्ट और 2003 का वर्ल्ड कप फाइनल उनके लिए वही दो मौके हैं।
उन्होंने कहा –
“हर खिलाड़ी चाहता है कि वो मैच दोबारा खेले जो उसने हारा हो। जीत की खुशी अलग होती है, लेकिन हार को बदल देने की चाहत हर किसी के मन में रहती है।”
राहुल द्रविड़ का यह खुलासा क्रिकेट फैंस के लिए काफी इमोशनल है, क्योंकि आज भी करोड़ों भारतीय चाहते हैं कि 2003 वर्ल्ड कप फाइनल का नतीजा कुछ और होता।
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