देश के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से राष्ट्र को संबोधित किया और खेलों को भारत की प्रगति की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेल नीति (NSP) देश के हर कोने में खेलों के विकास को नई दिशा देगी—चाहे वह गांव का स्कूल हो या ओलंपिक का मैदान। पीएम मोदी ने कहा कि यह बदलाव सिर्फ खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सोच बदलने की निशानी है। पहले खेलों को करियर के रूप में गंभीरता से नहीं लिया जाता था। बच्चे खेलते थे तो माता-पिता डांट देते थे, लेकिन अब माता-पिता खुद बच्चों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय खेल नीति को कई दशक बाद लागू किया गया है। 1 जुलाई को कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे पूरे देश में लागू किया गया। इसके तहत—
- कोचिंग, फिटनेस और खेल ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) को गांव-गांव तक पहुंचाने की योजना है।
- खेल प्रशासन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और नैतिकता को बढ़ावा मिलेगा।
- त्वरित समाधान के लिए राष्ट्रीय एजेंसियां और अंतर-मंत्रालय समितियां बनाई जाएंगी।
खेल नीति लागू होने के कुछ ही हफ्तों बाद, खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक संसद से पास कराया। यह कानून खेल महासंघों के लिए सख्त नियम और विवाद सुलझाने का स्पष्ट सिस्टम लाएगा।
पीएम मोदी ने कहा कि अब तक भारत का ओलंपिक प्रदर्शन औसत रहा है। टोक्यो ओलंपिक 2021 में भारत ने 1 स्वर्ण सहित कुल 7 पदक जीते थे, जो अब तक का सर्वश्रेष्ठ है। उन्होंने भरोसा जताया कि नई नीतियां और ढांचा भारत को खेलों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।
प्रधानमंत्री ने फिटनेस को खेल संस्कृति का अहम हिस्सा बताते हुए मोटापे को एक गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा— “भविष्य में हर तीसरा व्यक्ति मोटापे का शिकार हो सकता है, इसलिए तेल का अत्यधिक उपयोग कम करें।”
उन्होंने युवाओं से अपील की कि फिटनेस को जीवन का जरूरी हिस्सा बनाएं, क्योंकि स्वस्थ शरीर ही खेल और जीवन दोनों में सफलता की कुंजी है।
प्रधानमंत्री का यह संदेश साफ है—आने वाले समय में खेल केवल मनोरंजन या शौक नहीं रहेंगे, बल्कि शिक्षा, फिटनेस और राष्ट्रीय गर्व का अभिन्न हिस्सा बनेंगे। अब भारत का सपना सिर्फ पदक जीतना नहीं, बल्कि खेलों के माध्यम से विश्व में अपनी अलग पहचान बनाना है।
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